वंदे भारत से बुलेट ट्रेन तक: IIT पटना में तैयार हो रहा है 300 किमी/घंटा की रफ्तार का 'सेफ्टी कवच, तैयार हो रहे हैं 'सुपर इंजीनियर

भारतीय रेलवे ने देश में 300 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली ट्रेनों का सपना साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत IIT पटना में 25 विशेषज्ञ इंजीनियरों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है।

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Patna - भारतीय रेलवे ने देश में 300 किमी प्रति घंटे की रफ्तार के सपने को हकीकत में बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। तकनीक के साथ भरोसे की नींव रखते हुए, रेलवे ने अपने 25 चुनिंदा इंजीनियरों को विशेष प्रशिक्षण के लिए IIT पटना भेजा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य न केवल ट्रेनों की गति बढ़ाना है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि 100% सुरक्षा के साथ भारतीय रेल भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहे। 

IIT पटना बना हाई-स्पीड रेल की ट्रेनिंग का केंद्र

भारतीय रेलवे ने 300 किमी प्रति घंटे की रफ्तार का सपना साकार करने के लिए IIT पटना को अपना प्रशिक्षण केंद्र चुना है। यहाँ देश के अलग-अलग रेल जोन से आए 25 चुनिंदा इंजीनियरों को हाई-स्पीड नेटवर्क की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। यह पहल बुलेट ट्रेन और वंदे भारत जैसी ट्रेनों के भविष्य को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। 

तकनीकी छलांग: 130 से 300 किमी का सफर


अब तक भारतीय ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 120-130 किमी प्रति घंटे तक सीमित रही है, लेकिन अब लक्ष्य इसे दोगुने से भी अधिक करने का है। इसके लिए IIT पटना में ट्रैक डिजाइन, हाई-वोल्टेज सिस्टम और एडवांस सिग्नलिंग पर विशेष फोकस किया जा रहा है। मकसद साफ है कि भारतीय रेल की तकनीक वैश्विक स्तर की हो। 

बैलास्टलेस ट्रैक और स्मार्ट मॉनिटरिंग पर जोर

तेज रफ्तार के लिए पारंपरिक ट्रैक के बजाय आधुनिक बैलास्टलेस ट्रैक तकनीक की आवश्यकता होती है। ट्रेनिंग के दौरान इंजीनियरों को ट्रैक एलाइन्मेंट और स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। रेलवे का मानना है कि जब तक तकनीकी आधार मजबूत नहीं होगा, तब तक हाई-स्पीड का सपना सुरक्षित नहीं रह सकता। 

सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं: 100% सेफ्टी का लक्ष्य

IIT पटना के निदेशक प्रो. टी.एन. सिंह के अनुसार, हाई-स्पीड रेल में सुरक्षा के मानक 99 नहीं, बल्कि 100 प्रतिशत होने चाहिए। इसके लिए ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) और इमरजेंसी रिस्पॉन्स मैनेजमेंट की गहन ट्रेनिंग दी जा रही है। इसका उद्देश्य तेज रफ्तार के दौरान किसी भी संभावित दुर्घटना को शून्य पर लाना है। 

मिशन 2030: भविष्य की रेल व्यवस्था का खाका

रेलवे की योजना साल 2030 तक 800 जोड़ी हाई-स्पीड और सेमी हाई-स्पीड ट्रेनें चलाने की है। IIT पटना से प्रशिक्षित होकर निकलने वाले ये इंजीनियर भविष्य में 'मास्टर ट्रेनर' की भूमिका निभाएंगे और पूरे देश में रेल कर्मचारियों को आधुनिक तकनीक से लैस करेंगे। बिहार की यह पहल देश की रेल व्यवस्था को नई ऊंचाई देने जा रही है।