सड़कों पर 'अंधा' कर रहीं सफेद एलईडी लाइटें: सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद गुजरात में एक्शन, बिहार में कब जागेगा प्रशासन? राज्य में होते हैं सबसे ज्यादा हादसे
रात के वक्त चकाचौंध पैदा करने वाली सफेद एलईडी (LED) लाइटों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। जहाँ गुजरात में पुलिस इन लाइटों को उतरवाने के लिए विशेष अभियान चला रही है, वहीं बिहार में प्रशासन की सुस्ती आम लोगों की सुरक्षा के लिए बड़
Patna - रात के समय सड़कों पर चकाचौंध पैदा करने वाली हाई-इंटेंसिटी सफेद एलईडी (LED) लाइटों को लेकर कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इन चमकदार लाइटों को सुरक्षा के लिहाज से "पहियों पर हथियार" करार दिया है, जो सामने से आने वाले चालकों को क्षण भर के लिए अंधा (Temporary Blindness) कर देती हैं। कोर्ट और सरकार के सख्त आदेशों के बावजूद, देश के अलग-अलग राज्यों में इन नियमों के पालन की तस्वीर काफी जुदा नजर आ रही है।
गुजरात में इस मुद्दे पर यातायात विभाग और पुलिस प्रशासन युद्ध स्तर पर काम कर रहा है। राज्य के प्रमुख शहरों जैसे अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा में विशेष अभियान चलाकर हजारों वाहनों के चालान काटे जा रहे हैं और अवैध लाइटों को मौके पर ही उतरवाया जा रहा है। गुजरात पुलिस न केवल वाहन मालिकों, बल्कि ऐसी लाइटें बेचने और फिट करने वाले दुकानदारों पर भी सख्ती बरत रही है, ताकि सड़क हादसों में कमी लाई जा सके।
तकनीकी विशेषज्ञों और डॉक्टरों का मानना है कि इन सफेद एलईडी लाइटों से निकलने वाली रोशनी आंखों के रेटिना के लिए बेहद हानिकारक है। रात के समय जब ये लाइटें हाई-बीम पर होती हैं, तो सामने वाले चालक को सड़क पर मौजूद गड्ढे, राहगीर या अन्य वाहन दिखाई नहीं देते, जिससे भीषण दुर्घटनाएं होती हैं। यही कारण है कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत फैक्ट्री फिटेड लाइटों के अलावा किसी भी तरह की अतिरिक्त चमकदार लाइट लगाना दंडनीय अपराध है।
दूसरी तरफ, बिहार में स्थिति इसके उलट दिखाई दे रही है। राजधानी पटना सहित राज्य के विभिन्न जिलों में अवैध एलईडी लाइटों का आतंक सड़कों पर साफ देखा जा सकता है, लेकिन यातायात विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस या निरंतर कार्रवाई शुरू नहीं की गई है। बिहार की सड़कों और नेशनल हाईवे पर रात के समय हाई-बीम एलईडी लाइटों के कारण लगातार हादसे हो रहे हैं, फिर भी प्रशासन का इस ओर ध्यान न देना आम जनता की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े करता है।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार सरकार को भी गुजरात की तर्ज पर 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनानी चाहिए। जब तक यातायात पुलिस सड़कों पर उतरकर फिटनेस जांच और भारी जुर्माने की कार्रवाई नहीं करेगी, तब तक लोग नियमों का उल्लंघन करते रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद अब यह राज्यों की जिम्मेदारी है कि वे जनता की जान से खिलवाड़ करने वाली इन चमकदार लाइटों को सड़कों से पूरी तरह बाहर करें।