Census 2027 India:भारत की 16वीं जनगणना का अब घर से ही भरें डाटा फॉर्म, स्व-गणना की सुविधा शुरू, मोबाइल से होगा पूरा फॉर्म, इन 33 सवालों से तय होगा आपका पूरा डेटा

Census 2027 India: भारत अब एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है, जहां लोकतंत्र की सबसे बड़ी संख्यात्मक प्रक्रिया यानी जनगणना पूरी तरह डिजिटल रंग में रंगने जा रही है।

India 16th Census Self Enumeration Now Fill Form on Mobile A
भारत की 16वीं जनगणना का अब घर से ही भरें डाटा फॉर्म- फोटो : X

Census 2027 India: भारत अब एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है, जहां लोकतंत्र की सबसे बड़ी संख्यात्मक प्रक्रिया यानी जनगणना पूरी तरह डिजिटल रंग में रंगने जा रही है। भारत की जनगणना 2027 के पहले चरण में देश भर में मकानों का सूचीकरण और आवास गणना 2 मई 2026 से 31 मई 2026 तक होगी, जबकि इससे पहले 17 अप्रैल से 1 मई तक स्व-गणना की सुविधा शुरू की जा रही है। इस नई व्यवस्था में आम नागरिक खुद अपने मोबाइल से 33 सवालों का जवाब देकर अपने परिवार का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर सकेंगे। यह प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी और इसके बाद नागरिक को एक खास SE ID मिलेगी, जो आगे जनगणना कर्मियों के सत्यापन का आधार बनेगी।

सरकार का कहना है कि यह सिर्फ एक सर्वे नहीं, बल्कि डिजिटल भारत की नई बुनियाद है, जहां हर घर का डेटा नीति निर्माण का आधार बनेगा। अब यह जानना आसान होगा कि देश के किस राज्य, जिले और गांव में कितनी आबादी है, उनकी आर्थिक स्थिति कैसी है और विकास योजनाओं की जरूरत कहां सबसे ज्यादा है।

इस बार की जनगणना बेहद खास इसलिए भी है क्योंकि यह भारत की 16वीं जनगणना होगी और 2011 के बाद पहली व्यापक गणना है। बिहार जैसे बड़े राज्य में यह प्रक्रिया 265 शहरी और 534 ग्रामीण प्रशासनिक इकाइयों में लागू की जाएगी।

सरकार ने इसे डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की दिशा में बड़ा कदम बताया है। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि जनगणना कर्मियों का कार्यभार भी कम होगा। यह भी दावा किया गया है कि इससे डेटा अधिक सटीक और पारदर्शी होगा। स्व-गणना के दौरान परिवारों से मकान की स्थिति, कमरों की संख्या, पेयजल स्रोत, शौचालय व्यवस्था, बिजली, गैस कनेक्शन, परिवहन साधन, शिक्षा और डिजिटल संसाधनों जैसी 33 महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी जाएंगी। इसके अलावा मोबाइल नंबर केवल संपर्क के लिए दर्ज किया जाएगा और डेटा पूरी तरह गोपनीय रहेगा।

यह पूरी प्रक्रिया पोर्टल se.census.gov.in के माध्यम से संचालित होगी, जहां ओटीपी आधारित लॉगिन से नागरिक अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। एक बार सबमिट करने के बाद SE ID जनरेट होगी, जो जनगणना कर्मियों द्वारा सत्यापन के समय उपयोग में लाई जाएगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि कोई भी जनगणना कर्मी आधार, पैन या बैंक विवरण नहीं मांगेगा। यह प्रक्रिया केवल आंकड़ों के संकलन तक सीमित रहेगी।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इसे नए भारत की डेटा-संप्रभुता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। जहां एक ओर यह डिजिटल सुविधा जनता को सशक्त बनाएगी, वहीं दूसरी ओर यह सरकार को तेज और सटीक नीति निर्माण का आधार देगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह जनगणना भारत के विकास मॉडल को पूरी तरह डेटा-ड्रिवन बना देगी, जहां हर निर्णय आंकड़ों की नींव पर लिया जाएगा।