26 साल पुराना विवाद खत्म: नीतीश कैबिनेट ने सोन नदी जल बंटवारे के MoU को दी हरी झंडी, जानें किस राज्य को कितना मिला पानी
बिहार और झारखंड के बीच पिछले 26 वर्षों से लंबित सोन नदी जल बंटवारे के विवाद को सुलझाने की दिशा में नीतीश सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाया है। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में दोनों राज्यों के बीच हुए नए जल बंटवारे समझौते (MoU) के प्रारूप को औपचारिक मंजूर
Patna - बिहार और झारखंड के बीच दशकों से चला आ रहा सोन नदी जल विवाद अब पूरी तरह सुलझ गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस ऐतिहासिक समझौते के एकरारनामा (MoU) प्रारूप को औपचारिक स्वीकृति दे दी गई है। यह समझौता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में बनी सहमति के आधार पर तैयार किया गया है।
सोन नदी जल बंटवारे का नया फॉर्मूला
वर्ष 1973 में हुए बाणसागर समझौते के तहत अविभाजित बिहार को कुल 7.75 मिलियन एकड़ फीट (MAF) जल आवंटित किया गया था। साल 2000 में राज्य के बंटवारे के बाद से ही झारखंड अपना हिस्सा मांग रहा था, जिसकी वजह से कई सिंचाई परियोजनाएं रुकी हुई थीं। अब नई सहमति के अनुसार, बिहार को 5.75 MAF और झारखंड को 2.00 MAF जल मिलेगा। मंत्रिपरिषद की इस मंजूरी के साथ ही दोनों राज्यों के बीच वर्षों से लंबित विवाद का अंत हो गया है।
इन्द्रपुरी जलाशय परियोजना को मिली नई जान
इस समझौते का सबसे बड़ा लाभ इन्द्रपुरी जलाशय परियोजना को मिलेगा, जो जल बंटवारे पर सहमति न होने के कारण लंबे समय से अधर में लटकी थी। कैबिनेट के इस निर्णय से अब इस परियोजना के कार्यान्वयन का मार्ग प्रशस्त हो गया है। इन्द्रपुरी जलाशय के बनने से सोन नहर प्रणाली को पर्याप्त पानी मिल सकेगा, जिससे जल संकट की स्थिति में भी फसलों को बचाना आसान होगा।
बिहार के 8 जिलों के किसानों को होगा सीधा लाभ
सोन नदी के पानी के इस सुनिश्चित बंटवारे से दक्षिण और मध्य बिहार की कृषि व्यवस्था में बड़ा सुधार आएगा। इस निर्णय से मुख्य रूप से भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, पटना, गया और अरवल जिले लाभान्वित होंगे। इन जिलों में सिंचाई सुविधाओं को न केवल स्थायित्व मिलेगा, बल्कि खेती की लागत में कमी और पैदावार में वृद्धि होने की भी उम्मीद है।
समझौते की पृष्ठभूमि और राजनीतिक पहल
इस विवाद को सुलझाने में पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की 27वीं बैठक की अहम भूमिका रही है, जहाँ बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने राज्य का पक्ष मजबूती से रखा था। बाणसागर समझौते के बाद से ही पानी की उपलब्धता को लेकर दोनों राज्यों के बीच खींचतान चल रही थी, जिसे अब एक स्पष्ट फॉर्मूले के तहत सुलझा लिया गया है। इस ऐतिहासिक कदम से न केवल सिंचाई बल्कि भविष्य में जल प्रबंधन की अन्य योजनाओं को भी गति मिलेगी।