वर्दी कभी उतारी नहीं जाती, बस रूप बदल लेती है: IPS काम्या मिश्रा ने इस्तीफे पर तोड़ी चुप्पी

मिलिए बिहार कैडर की आईपीएस काम्या से जिन्होंने महज 22 साल के उम्र में IPS बनने का गौरव हासिल किया, लेकिन हाल ही में 28 की उम्र में उन्होंने इस्तीफा दे दिया, जिसे राष्ट्रपति द्वारा स्वीकार कर लिया गया है। इस्तीफे के पीछे क्या है कारण,काम्या कि जुबानी

 IPS Kamya Mishra breaks silence on resignation
पूर्व IPS काम्या मिश्रा ने इस्तीफे पर तोड़ी चुप्पी- फोटो : news 4 nation

बिहार कैडर की चर्चित पूर्व IPS अधिकारी काम्या मिश्रा ने अपने इस्तीफे के करीब 18 महीने बाद एक टॉक शो में पहली बार खुलकर बात की है। 5 अगस्त 2024 को "व्यक्तिगत कारणों" से इस्तीफा देने के बाद से उन्होंने इस पर पूरी तरह चुप्पी साध रखी थी। अब 27 मार्च 2025 को सरकार द्वारा इस्तीफा मंजूर किए जाने के बाद, काम्या ने स्पष्ट किया है कि वर्दी छोड़ना उनके लिए किसी त्याग से कम नहीं था, बल्कि यह जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत है।

वर्दी का सम्मान और शुरुआती सफर

अपनी यात्रा को याद करते हुए काम्या ने कहा कि वर्दी असल में कभी उतारी नहीं जाती, बस अपना रूप बदल लेती है। ओडिशा के रायरंगपुर जैसे छोटे क्षेत्र से निकलकर 2019 में पहले ही प्रयास में UPSC पास करने वाली काम्या 23 साल की उम्र में ASP बनने वाली देश की चुनिंदा अधिकारियों में शामिल थीं। उन्होंने बताया कि बिहार के वैशाली (लालगंज) से SHO के रूप में शुरू हुआ उनका सफर पटना और दरभंगा तक पहुँचा, जिसने उन्हें एक मजबूत पहचान दी।

बिहार पुलिस में समानता का अनुभव

काम्या मिश्रा ने बिहार में अपने कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि राज्य ने उन्हें कभी यह अहसास नहीं होने दिया कि वह एक महिला अधिकारी हैं। उन्हें अपने पुरुष सहयोगियों के समान ही कठिन ऑपरेशनों, छापों और महत्वपूर्ण पोस्टिंग की जिम्मेदारियां दी गईं। उनके अनुसार, बिहार के वरिष्ठ अधिकारियों से मिले समर्थन और समान व्यवहार ने ही उन्हें स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने और पुलिसिंग की बारीकियों को समझने में मदद की।

पुलिसिंग की चुनौतियाँ और भावनात्मक संघर्ष

पुलिस सेवा के कठिन पहलुओं पर बात करते हुए काम्या ने इसे "इमोशनली थका देने वाला" प्रोफेशन बताया। उन्होंने साझा किया कि जब समाज त्यौहार मनाता है, तब पुलिस दंगों और हिंसा से निपट रही होती है। उनके अनुसार, सबसे मुश्किल पल वह होता है जब आप अपने सामने साथी अधिकारियों को घायल होते देखते हैं। उन्होंने पुलिस के काम की तुलना समाज के 'गंदे पानी' (इंसानी दुख) को साफ करने से की, जहाँ अक्सर प्रशंसा के बदले नाराजगी ही मिलती है।

भविष्य का लक्ष्य: शिक्षा के माध्यम से सेवा

इस्तीफे के फैसले को स्पष्ट करते हुए काम्या ने कहा कि यह नौकरी छोड़ना नहीं, बल्कि एक नई दिशा चुनने का निर्णय था। अब वह शिक्षा (Education) के क्षेत्र में उतरकर समाज की सेवा करना चाहती हैं। उनका अगला लक्ष्य युवाओं को आगे बढ़ने के लिए बेहतर अवसर और मंच प्रदान करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वास्तविक ताकत यह समझने में है कि कब पुरानी भूमिका को विराम देना है और कब कुछ नया सृजन करना है।