Bihar Politics: बिहार की सियासत में टीम निशांत की दस्तक, जदयू के युवा विधायक बोले -अब वारिस को सौंपिए ताज, 2030 का रण होगा निशांत के नाम

Bihar Politics: सत्ता के गलियारों में फुसफुसाहट तेज है और जदयू के अंदर टीम निशांत नाम की एक नई सियासी सरगोशी सुनाई देने लगी है।...

JDU MLA Backs Nishant Says Pass the Crown to the Heir
बिहार की सियासत में टीम निशांत की दस्तक- फोटो : reporter

Bihar Politics: बिहार की सियासत में इन दिनों एक नया किस्सा गर्म है। सत्ता के गलियारों में फुसफुसाहट तेज है और जदयू के अंदर टीम निशांत नाम की एक नई सियासी सरगोशी सुनाई देने लगी है। पटना में जदयू विधायक रूहेल रंजन के आवास पर पार्टी के 14 युवा विधायक जमा हुए और एक सुर में एलान कर दिया अब वक्त आ गया है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी का ताज निशांत कुमार के सिर सजाया जाए।

यह कोई मामूली बयानबाजी नहीं थी, बल्कि सियासी पैगाम भी था। इन युवा विधायकों ने खुद को “टीम निशांत” बताते हुए कहा कि वे आने वाले वक्त में निशांत कुमार के नेतृत्व में काम करना चाहते हैं। उनका दावा है कि 2030 का चुनाव भी निशांत की अगुवाई में लड़ा जाएगा।

विधायकों का कहना है कि 2025 के चुनाव में “2025 से 30 फिर से नीतीश” के नारे पर जनता ने जबरदस्त भरोसा जताया और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के चेहरे पर वोट देकर एनडीए को भारी बहुमत दिलाया। मगर अब पार्टी के अंदर नई पीढ़ी यह चाहती है कि उस सियासी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए निशांत कुमार को मैदान में उतारा जाए।

रूहेल रंजन ने साफ लहजे में कहा कि आने वाले समय में निशांत कुमार को ही मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। वहीं विधायक शुभानंद मुकेश ने उन्हें “नीतीश कुमार का वर्जन टू” करार देते हुए कहा कि वही बिहार की सियासत को नई दिशा दे सकते हैं। समृद्ध वर्मा का कहना है कि निशांत ही नीतीश कुमार के विजन को आगे ले जाने की काबिलियत रखते हैं, जबकि चेतन आनंद ने तो यहां तक कह दिया कि “निशांत अब बिहार की मांग बन चुके हैं।”

इधर निशांत कुमार भी सियासी मैदान में उतरने के संकेत दे चुके हैं। उन्होंने कहा है कि वे जल्द ही पूरे बिहार के 38 जिलों का दौरा करेंगे और आम अवाम से सीधा संवाद करेंगे। उनका कहना है कि वे बिहार को करीब से समझना चाहते हैं और लोगों की नब्ज पकड़ना चाहते हैं।

हालांकि जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि युवा विधायक उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर रहे हैं, तो उन्होंने सिर्फ हल्की सी मुस्कान दी और खामोश रह गए। मगर सियासत के जानकार कहते हैं बिहार की राजनीति में अक्सर मुस्कान ही सबसे बड़ा इशारा होती है। अब देखना यह है कि यह मुस्कान आने वाले दिनों में सत्ता की कहानी लिखती है या सिर्फ सियासी अटकलों का हिस्सा बनकर रह जाती है।