लारा प्रोजेक्ट मनी लॉन्ड्रिंग केस: लालू-राबड़ी और तेजस्वी के खिलाफ कोर्ट में फैसला सुरक्षित, जानें कब आएगा निर्णय

लारा प्रोजेक्ट मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू परिवार पर आरोप तय करने पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। वहीं आईआरसीटीसी घोटाले में सीबीआई ने हाई कोर्ट में लालू परिवार की याचिका का कड़ा विरोध किया है।

लारा प्रोजेक्ट मनी लॉन्ड्रिंग केस: लालू-राबड़ी और तेजस्वी के

Patna - लारा परियोजना (Lara Project) मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से फिलहाल फौरी राहत मिली है। गुरुवार को अदालत ने इस मामले में आरोप तय करने (Charge Framing) पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में अदालत 3 मार्च को अपना फैसला सुना सकती है। 

लारा प्रोजेक्ट: आरोप तय करने पर सस्पेंस बरकरार

विशेष अदालत में चल रहा यह मामला लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव सहित कुल 16 आरोपियों के खिलाफ है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच कर रही है। गुरुवार को लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने तय किया कि आरोपों पर आदेश बाद में दिया जाएगा। यदि 3 मार्च को कोर्ट आरोप तय करने का आदेश देता है, तो इस मामले में नियमित ट्रायल शुरू हो जाएगा। 

आईआरसीटीसी घोटाला: सीबीआई ने दिल्ली हाई कोर्ट में किया विरोध

इससे पहले, बुधवार (11 फरवरी) को आईआरसीटीसी (IRCTC) घोटाले में भी बड़ी कानूनी सरगर्मी देखने को मिली। ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोप तय किए जाने के फैसले को लालू परिवार ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसका सीबीआई (CBI) ने पुरजोर विरोध किया। सीबीआई ने अदालत में तर्क दिया कि आरोपी केवल 'अभियोजन की मंजूरी' (Sanction) के तकनीकी आधार पर मुकदमे से बच नहीं सकते। 

सीबीआई की दलील: 'मंजूरी की अनिवार्यता नहीं थी'

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में सीबीआई की ओर से पेश अतिरिक्त सालिसिटर जनरल (ASG) डी पी सिंह ने कई महत्वपूर्ण दलीलें रखीं:

  • धारा 19 की बाध्यता: उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ताओं पर मुकदमा चलाने के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 के तहत पूर्व मंजूरी लेना अनिवार्य नहीं था।

  • अटॉर्नी जनरल की राय: अदालत को बताया गया कि मार्च 2020 में तत्कालीन अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने भी इस संबंध में यही राय दी थी।

  • प्रक्रिया में सुधार: एएसजी ने स्पष्ट किया कि चूंकि मामला लंबा खिंच रहा था, इसलिए कानून के पालन के लिए बाद में मंजूरी ले ली गई थी। यह मंजूरी तब ली गई जब धारा 207 (CrPC) के तहत कार्यवाही चल रही थी, इसलिए इससे केस पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा। 

  • लालू परिवार का पक्ष: 'बिना मंजूरी लिया गया संज्ञान'

  • लालू प्रसाद, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि ट्रायल कोर्ट ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 या सीआरपीसी की धारा 197 के तहत आवश्यक 'मंजूरी' के अभाव में ही मामले का संज्ञान लिया, जो कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण है। गौरतलब है कि 13 अक्टूबर 2025 को राउज एवेन्यू की विशेष अदालत ने धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के कथित अपराधों के लिए आरोप तय किए थे।