भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की बड़ी सफलता: रोह अंचल के तत्कालीन CO भोला पासवान को चार वर्ष की सश्रम कारावास
पटना स्थित विशेष न्यायालय निगरानी की अदालत द्वारा भ्रष्टाचार के एक पुराने मामले में कड़ा फैसला सुनाया गया है। कोर्ट ने नवादा जिले के रोह अंचल के तत्कालीन अंचलाधिकारी भोला पासवान को रिश्वत मामले में दोषी करार देते हुए सश्रम कारावास की सजा सुनाई है...
Patna : पटना स्थित विशेष न्यायालय निगरानी के न्यायाधीश अतुल कुमार सिंह द्वारा भ्रष्टाचार के एक पुराने मामले में कड़ा फैसला सुनाया गया है। अदालत ने नवादा जिले के रोह अंचल के तत्कालीन अंचलाधिकारी (CO) भोला पासवान को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7, 13(2) सह पठित धारा 13(1)(डी) के तहत दोषी करार दिया है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा की गई प्रभावी पैरवी के बाद अदालत ने यह सजा सुनाई।
दरवाजा और छज्जा लगवाने के एवज में मांगी थी 4,000 रिश्वत; रंगे हाथों हुए थे गिरफ्तार
यह मामला नवादा जिले के रोह थाना अंतर्गत ग्राम समरेठा निवासी परिवादी राकेश कुमार (पिता—वासुदेव यादव) की शिकायत से जुड़ा है। परिवादी से उनके घर में दरवाजा, खिड़की एवं छज्जा लगवाने हेतु जारी जमीनी विवाद को सुलझाने के नाम पर तत्कालीन CO भोला पासवान ने 4,000 की रिश्वत मांगी थी। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने जाल बिछाकर 15 अक्टूबर 2014 को आरोपी अधिकारी को 4,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।
निगरानी टीम और विशेष लोक अभियोजक की सटीक पैरवी से सिद्ध हुआ दोष
इस मामले में तत्कालीन अनुसंधानकर्त्ता बिरेन्द्र नारायण सिंह (पुलिस निरीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना) द्वारा समय पर सटीक और मजबूत आरोप पत्र (Chargesheet) दाखिल किया गया था। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक श्री रितेश कुमार ने अदालत में प्रभावी ढंग से पक्ष रखा। मामले की सुनवाई के दौरान कुल 11 साक्षियों की गवाही कराई गई, जिसके आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया।
अदालत ने सुनाई चार साल की सश्रम कारावास और अर्थदण्ड की सजा
विशेष न्यायालय ने दोषी तत्कालीन अंचलाधिकारी भोला पासवान को दो अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई है। धारा 7 के तहत तीन वर्ष का सश्रम कारावास एवं 5,000 का अर्थदण्ड। धारा 13(2) सह पठित 13(1)(डी) के तहत चार वर्ष का सश्रम कारावास एवं 5,000 का अर्थदण्ड। अदालत के आदेशानुसार दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अर्थदण्ड की राशि जमा नहीं करने की स्थिति में आरोपी को एक महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
वर्ष 2026 में अब तक 11 भ्रष्टाचार मामलों में मिली सजा; निगरानी ब्यूरो की कार्रवाई जारी
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की प्रतिबद्धता के कारण वर्ष 2026 में अब तक कुल 11 भ्रष्ट अधिकारियों व कर्मचारियों को न्यायालय द्वारा सजा सुनाई जा चुकी है। ब्यूरो द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वैशाली, नवादा, नालंदा, रोहतास, गया, मुजफ्फरपुर, पटना, मुंगेर आदि जिलों में रिश्वत लेने वाले रेंजर, कनिष्ठ अभियंता, थानाध्यक्ष, जिला योजना पदाधिकारी और राजस्व कर्मचारियों को सजा दिलाई गई है।
रंजीत की रिपोर्ट