Bihar News : सासामुसा चीनी मिल का मुद्दा विधानसभा में गूंजा, जेडीयू विधायक मंजीत सिंह ने स्क्रैप में बेचने का किया विरोध, मिल दोबारा चालू कराने की रखी मांग

Bihar News : गोपालगंज की वर्षों से बंद पड़ी सासामुसा चीनी मिल का मुद्दा बिहार विधानसभा में गूंजा। बरौली के जेडीयू विधायक मंजीत सिंह ने इसे दोबारा चालू कराने की मांग उठाई।

Bihar News : सासामुसा चीनी मिल का मुद्दा विधानसभा में गूंजा,
विधायक ने रखी मांग - फोटो : NAMO NARAYAN

GOPALGANJ : गोपालगंज जिले की वर्षों से बंद पड़ी ऐतिहासिक सासामुसा चीनी मिल का मामला बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान पूरी प्रमुखता से उठा। बरौली क्षेत्र से जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के विधायक मंजीत सिंह ने सरकार का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित करते हुए मिल को स्क्रैप (कबाड़) के रूप में नीलाम कर बेचने के फैसले पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने सदन में सरकार से इस चीनी मिल को पुनः चालू कराने और पीड़ित किसानों व कर्मचारियों के बकाये का तुरंत भुगतान कराने की मांग पुरजोर ढंग से रखी।

सदन को संबोधित करते हुए विधायक मंजीत सिंह ने आंकड़ों के साथ मिल की वर्तमान स्थिति को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि सासामुसा चीनी मिल पर क्षेत्र के हजारों गन्ना किसानों का लगभग 43 करोड़ रुपये और वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों का 9 करोड़ रुपये का बकाया लंबित है। इसके अलावा, विभिन्न व्यावसायिक बैंकों का भी करीब 68 करोड़ रुपये का मामला अदालत में प्रक्रियाधीन है। ऐसे में मिल को नीलाम कर स्क्रैप में काटने की शुरू हुई प्रक्रिया से स्थानीय किसानों, मजदूरों और आम जनता के बीच गहरा असंतोष और नाराजगी व्याप्त है।

विधायक ने सरकार से जनहित में हस्तक्षेप करने की अपील करते हुए कहा कि इस मिल को कबाड़ में बेचने के बजाय दोबारा संचालित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने सदन को अवगत कराया कि एक नया निवेशक बैंकों का पूरा बकाया चुकाने के लिए तैयार है और उसने इसी चालू वर्ष के पेराई सत्र से ही मिल में फिर से उत्पादन शुरू करने का एक ठोस प्रस्ताव भी दिया है। विधायक का मानना है कि यदि सरकार इस दिशा में सकारात्मक पहल करती है, तो इससे मिल की पुरानी साख बहाल हो सकती है।

विधायक मंजीत सिंह ने जोर देकर कहा कि सासामुसा चीनी मिल के फिर से चालू होने से न केवल गोपालगंज और आसपास के जिलों के हजारों किसानों को अपनी फसल का उचित व समय पर दाम मिल सकेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर मजदूरों और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इससे इलाके की चरमराती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा और आर्थिक राहत मिलेगी, जो कि जनहित और राज्य के औद्योगिक विकास दोनों के दृष्टिकोण से अत्यंत आवश्यक है।

सदन में उठे इस मुद्दे के बाद अब क्षेत्र के किसानों और आम लोगों में एक नई उम्मीद जगी है। स्थानीय निवासियों को उम्मीद है कि राज्य सरकार विधायक द्वारा दिए गए सुझावों और निवेशक के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करेगी। यदि समय रहते इस दिशा में प्रशासनिक व सरकारी स्तर पर ठोस निर्णय लिया जाता है, तो वर्षों से बंद पड़ी यह मिल एक बार फिर क्षेत्र में खुशहाली और आर्थिक प्रगति का जरिया बन सकती है।

नमो नारायण की रिपोर्ट