मनेर नगर परिषद में नाला निर्माण में भ्रष्टाचार का खेल,कीचड़ पर रखी जा रही विकास की 'कागजी' नींव
बिहार में सुशासन के दावों के बीच मनेर नगर परिषद से भ्रष्टाचार की पोल खोलती तस्वीर सामने आई है। बस्ती रोड में 70 लाख की लागत से बन रहे नाले में एस्टीमेट को ताक पर रखकर सीधे कीचड़ और गीली मिट्टी पर ढलाई की जा रही है।
बिहार में सुशासन के दावों के बीच भ्रष्टाचार का एक काला खेल राजधानी पटना से सटे मनेर नगर परिषद में धड़ल्ले से जारी है। नगर विकास एवं आवास विभाग की ओर से बस्ती रोड में करीब 70 लाख रुपये की लागत से बन रहा सड़क एवं नाला अपनी मजबूती के लिए नहीं, बल्कि नियमों की खुलेआम अनदेखी के लिए चर्चा में है। आरोप है कि सरकारी पैसे की बंदरबांट के चक्कर में नाले का निर्माण प्राक्कलन को ताक पर रखकर किया जा रहा है।
फाइलों में मजबूती, धरातल पर धोखाधड़ी
सरकारी एस्टीमेट (प्राक्कलन) के अनुसार, नाले की नींव को मजबूती देने के लिए जमीन पर सबसे पहले 4 इंच लोकल सैंड (बालू) की परत बिछानी थी। इसके ऊपर 4 इंच PCC और फिर 4 इंच RCC की ढलाई का प्रावधान है। इसके अलावा 3 फिट ऊंचा एवं 6 इंच चौड़ा ढलाई कर नाला के दोनों तरफ आरसीसी दीवार बनाना है लेकिन निर्माण स्थल पर सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। ठेकेदार ने मुनाफे के लिए बालू और पीसीसी की परत को पूरी तरह गायब कर दिया है और सीधे कीचड़ पानी व गीली मिट्टी के ऊपर 2-3 इंच की घटिया ढलाई कर रहे है। मिट्टी और पानी मे हो रहे नाले के निर्माण कार्य का वीडियो न्यूज फोर नेशन के पास उपलब्ध है।
कमीशन का 'सिंडिकेट' और अधिकारियों की चुप्पी
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय इंजीनियरों और ठेकेदार के बीच कमीशन का खेल इतना गहरा है कि कोई भी अधिकारी मौके पर निरीक्षण करने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। अधिकारियों की इसी मौन सहमति ने ठेकेदार के हौसले इतने बुलंद कर दिए हैं कि उसके लोग खुलेआम कहते हैं, "चाहे डीएम से शिकायत करो या सीएम से, कुछ नहीं होगा। ऊपर से नीचे तक सबको कमीशन देना पड़ता है।"
जनता के टैक्स के पैसे पर 'डाका'
गुस्साए स्थानीय निवासियों का कहना है कि भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ा यह नाला पहली बारिश का दबाव भी नहीं झेल पाएगा। जनता की गाढ़ी कमाई के 70 लाख रुपये सीधे तौर पर पानी में बहाए जा रहे हैं।
क्या कहतें हैं अधिकारी
स्थानीय लोगों से मिल रही शिकायतों पर जब मनेर नगर परिषद के सहायक अभियंता अर्चना कुमारी को अवगत कराया गया तो इन्होंने निर्माण में हो रही गड़बड़ी को दूर करने के बजाए ठेकेदार को ही क्लीन चिट दे दिया। इन्होंने कहा प्राक्कलन के अनुसार कार्य हो रहा है। पीसीसी के बाद ही आरसीसी का ढलाई किया जा रहा है
जिलाधिकारी से जांच की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय नागरिकों ने पटना जिलाधिकारी (DM) को लिखित शिकायत भेजकर निर्माण कार्य पर तुरंत रोक लगाने और इसकी उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने इस 'कमीशनखोरी' में शामिल नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी और संबंधित अभियंताओं पर भी सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।