Bihar News : सामाजिक न्याय पर मंत्री संतोष सुमन का आरजेडी से सीधा सवाल, कहा 'नारों से नहीं, 1990-2005 के कामकाज के प्रमाणित आंकड़ों से दे जवाब'

Bihar News : हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (से.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार सरकार के लघु जल संसाधन मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने तेजस्वी यादव और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) पर तीखा हमला बोला है।

Bihar News : सामाजिक न्याय पर मंत्री संतोष सुमन का आरजेडी से
तेजस्वी पर तंज - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (से.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं लघु जल संसाधन मंत्री, बिहार सरकार डॉ. संतोष कुमार सुमन ने कहा कि सामाजिक न्याय का नारा देने से नहीं, बल्कि वंचित समाज के जीवन में ठोस बदलाव लाने से सामाजिक न्याय स्थापित होता है। तेजस्वी यादव और राजद को बिहार की जनता के सामने जवाब देना चाहिए कि 1990 से 2005 तक राजद शासन के दौरान महादलित परिवारों के बच्चों की शिक्षा, युवाओं के रोजगार एवं कौशल विकास और भूमिहीन परिवारों को आवासीय भूमि उपलब्ध कराने के लिए कौन-से ठोस कदम उठाए गए? इन सवालों के जवाब राजनीतिक नारों से नहीं, बल्कि प्रमाणित आँकड़ों और उपलब्धियों के साथ दिए जाने चाहिए।

डॉ. सुमन ने कहा कि बिहार में एनडीए शासन के दौरान महादलित विकास मिशन, विकास मित्र, छात्रवृत्ति, आवासीय भूमि तथा दशरथ मांझी कौशल विकास योजना जैसी पहलें वंचित समाज को शिक्षा, कौशल विकास और बेहतर जीवन के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गईं। तेजस्वी यादव स्पष्ट करें कि महादलित समाज के विकास को लेकर राजद की वर्तमान कार्ययोजना क्या है? शिक्षा, रोजगार, आवास और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए उनकी पार्टी ने कौन-से मापने योग्य लक्ष्य निर्धारित किए हैं? जनता को यह जानने का अधिकार है कि महादलित समाज के उत्थान के लिए राजद के पास ठोस नीति है या केवल राजनीतिक बयानबाजी।

डॉ. संतोष कुमार सुमन ने कहा कि महादलित समाज किसी राजनीतिक दल का वोट बैंक नहीं, बल्कि समान अधिकार, सम्मान और विकास का हकदार है। सामाजिक न्याय का वास्तविक अर्थ है कि गरीब परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हों, भूमिहीन परिवारों को आवासीय भूमि मिले और वंचित समाज को विकास की मुख्यधारा में सम्मानजनक भागीदारी मिले।

मंत्री संतोष सुमन ने कहा की तेजस्वी यादव और राजद को महादलित समाज के नाम पर राजनीति करने के बजाय अपने शासनकाल का हिसाब और भविष्य की ठोस कार्ययोजना जनता के सामने रखनी चाहिए। बिहार की जनता अब नारों से नहीं, बल्कि नीतियों, उपलब्धियों और धरातल पर दिखने वाले बदलावों से सामाजिक न्याय का मूल्यांकन करेगी।