Bihar News : मंत्री श्रवण कुमार ने पूर्व राज्यपाल डॉ. डी.वाई. पाटिल के निधन पर जताई संवेदना, कहा शिक्षा, स्वास्थ्य और जनसेवा के क्षेत्र में रहा अमूल्य योगदान

Bihar News : बिहार, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल डॉ. डी.वाई. पाटिल का निधन हो गया। जिसके बाद मंत्री श्रवण कुमार ने अपनी संवेदना व्यक्त की है.........पढ़िए आगे

Bihar News : मंत्री श्रवण कुमार ने पूर्व राज्यपाल डॉ. डी.वाई
डॉ. डी.वाई. पाटिल का निधन - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : बिहार के पूर्व राज्यपाल पद्मश्री डॉ डी वाय पाटिल के निधन पर सूचना एवं जनसंपर्क विभाग और ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने शोक संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने अपने शोक संदेश में कहा है कि डॉ पाटिल का निधन अत्यंत दुखद है। वे एक दूरदर्शी शिक्षाविद, समाजसेवी और बिहार के पूर्व राज्यपाल थे। उन्होंने राज्यपाल के तौर पर बिहार में शिक्षा, स्वस्थ और जनसेवा के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया था। उनका जीवन प्रेरणादायक था। मंत्री ने दिवंगत आत्मा की चिर शांति प्रदान करे और अपने श्रीचरणों में स्थान दें। ईश्वर शोकाकुल परिजनों और उनके शुभचिंतको को इस दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें।

बता दें की बिहार, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल तथा वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ. डी.वाई. पाटिल का मंगलवार सुबह पश्चिमी महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित उनके निवास स्थान पर निधन हो गया। वे 90 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से लंबी बीमारी से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर से शिक्षा, राजनीति और समाज सेवा के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके परिवार में बेटे सतेज पाटिल (पूर्व राज्य मंत्री व कांग्रेस नेता), संजय पाटिल, अजिंक्य पाटिल और बेटी डॉ. नंदिता पालशेतकर (प्रसिद्ध स्त्री रोग विशेषज्ञ) हैं।

22 अक्टूबर 1935 को कोल्हापुर जिले के अंबाप गांव में एक साधारण किसान परिवार में जन्मे डॉ. पाटिल ने अपनी शुरुआती पढ़ाई के बाद राजाराम कॉलेज, कोल्हापुर से स्नातक किया। इसके बाद उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय से प्रथम श्रेणी के साथ कानून (लॉ) की डिग्री हासिल की। समाज सेवा और सार्वजनिक जीवन के प्रति समर्पित डॉ. पाटिल ने बहुत कम उम्र में ही राजनीति में प्रवेश किया था। वे 1957 से 1962 तक कोल्हापुर के मेयर रहे और इसके बाद 1967 तथा 1972 में पन्हाला विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। राजनीतिक जीवन के साथ-साथ डॉ. पाटिल को शिक्षा के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। उन्होंने नवी मुंबई में पहला प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज स्थापित कर निजी उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत की। वर्ष 1983 में उनके द्वारा स्थापित 'डी. वाई. पाटिल ग्रुप' आज नवी मुंबई, पुणे और कोल्हापुर में 160 से अधिक शिक्षण संस्थानों, डीम्ड विश्वविद्यालयों तथा आधुनिक मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर का संचालन करता है। नवी मुंबई स्थित प्रसिद्ध 'डी. वाई. पाटिल स्टेडियम' का निर्माण भी उन्हीं की देन है, जहाँ कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों का आयोजन हो चुका है।

संवैधानिक पदों पर अपनी सेवा देते हुए डॉ. डी.वाई. पाटिल ने त्रिपुरा के राज्यपाल के रूप में कार्य किया। इसके पश्चात वे 2013 से 2014 तक बिहार के राज्यपाल रहे। इस दौरान वर्ष 2014 में उन्हें कुछ समय के लिए पश्चिम बंगाल के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था। शिक्षा, खेल और समाज सेवा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट और अतुलनीय योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 1991 में देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान 'पद्म श्री' से सम्मानित किया था।