Bihar News: SVU की रेड के बाद गायब IAS! संजीव हंस के ऑफिस पर लटका ताला,टेंडर घोटाले में नए खुलासों से मचा हड़कंप
Bihar News: ठेकेदार और कथित दलाल रिशु श्री से जुड़े भ्रष्टाचार के इस बहुचर्चित प्रकरण में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजीव हंस की गैरमौजूदगी अब सत्ता के गलियारों में सबसे बड़ा सवाल बन गई है।...
Bihar News: बिहार के चर्चित टेंडर घोटाला मामले में शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। ठेकेदार और कथित दलाल रिशु श्री से जुड़े भ्रष्टाचार के इस बहुचर्चित प्रकरण में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजीव हंस की गैरमौजूदगी अब सत्ता के गलियारों में सबसे बड़ा सवाल बन गई है। स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) उन्हें तलाश रही है, लेकिन उनका कोई आधिकारिक ठिकाना सामने नहीं आ रहा। इस बीच पटना सचिवालय स्थित उनके सरकारी चैंबर पर लटका ताला कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है।
सचिवालय में संजीव हंस का चैंबर पूरी तरह बंद पड़ा है। अन्य अधिकारियों के कक्ष खुले हैं, लेकिन उनके कार्यालय के बाहर सन्नाटा पसरा हुआ है। कर्मचारियों की चुप्पी और चैंबर में साफ-सफाई तक नहीं होने की स्थिति ने अटकलों का बाजार और गर्म कर दिया है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि उन्होंने पिता के इलाज का हवाला देकर लंबी छुट्टी ली है, लेकिन वे कहां हैं, इसकी स्पष्ट जानकारी किसी के पास नहीं है। 10 जून 2026 को SVU ने इस मामले में संयुक्त सचिव मुमुक्षु चौधरी, मुख्य अभियंता तारिणी दास और कार्यपालक अभियंता उमेश कुमार सिंह को गिरफ्तार किया था। इसके बाद से संजीव हंस सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं। जांच एजेंसी दो बार उनके कार्यालय तक पहुंची, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। बाद में SVU ने उन्हें फरार बताते हुए उनकी तलाश तेज कर दी।
जांच के केंद्र में 2018 का वह बहुचर्चित फिजिकल मॉडलिंग सेंटर प्रोजेक्ट है, जिसकी लागत करीब 125 करोड़ रुपए बताई गई थी। आरोप है कि टेंडर की शर्तें इस तरह तैयार कराई गईं कि एक विशेष कंपनी को लाभ मिले। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस पूरे खेल में रिशु श्री की अहम भूमिका थी और कमीशन के रूप में करोड़ों रुपए का लेन-देन हुआ। जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि मातृसेवा कंस्ट्रक्शन के माध्यम से कथित तौर पर 67 लाख रुपए संजीव हंस तक पहुंचाए गए। इसके अलावा उनकी पत्नी हरलोवलीन कौर उर्फ मोना हंस के नाम पर संपत्तियां अर्जित करने और अन्य मामलों में भी आर्थिक अनियमितताओं के आरोपों की जांच चल रही है।
उधर, गिरफ्तारी की आशंका के बीच संजीव हंस ने निगरानी की विशेष अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल कर रखी है। वहीं बेऊर जेल में बंद मुख्य अभियंता तारिणी दास ने भी जमानत की गुहार लगाई है। अदालत में इन याचिकाओं पर सुनवाई को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों की नजरें टिकी हुई हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या संजीव हंस कानून के सामने पेश होंगे या फिर जांच एजेंसियों को उनकी तलाश में और लंबा इंतजार करना पड़ेगा। फिलहाल बंद चैंबर, बढ़ती जांच और अदालत की चौखट पर पहुंची लड़ाई ने बिहार के इस कथित टेंडर घोटाले को नई राजनीतिक और प्रशासनिक गर्मी दे दी है।