Bihar News : मोमिनीन-ए-अज़ीमाबाद ने 'वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा' पर सम्मेलन का किया आयोजन, इरशाद अली आजाद ने कहा- वक्फ ट्रस्टियों के कामकाज पर नजर रखे जनता
Bihar News : राजधानी पटना के पत्थर की मस्जिद स्थित कर्नल कलबे अली खान वक्फ एस्टेट में 'मोमिनीन-ए-अज़ीमाबाद' द्वारा एक दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया गया......पढ़िए आगे
PATNA : मोमिनीन-ए-अज़ीमाबाद, पटना द्वारा "वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और हमारी जिम्मेदारियां: पैगंबर मुहम्मद की सीरत की रौशनी में" विषय पर एक सम्मेलन का आयोजन कर्नल कलबे अली खान वक्फ एस्टेट,नियर पत्थर की मस्जिद, पटना में किया गया. इस सम्मेलन में वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और उनसे प्राप्त आय को गरीबों, अनाथों, विधवाओं और अन्य सामाजिक विकास के मुद्दों पर खर्च करने पर जोर दिया गया। इस सम्मेलन में विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष और जदयू के वरिष्ठ नेता इरशाद अली आजाद ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दा है जिस पर सार्वजनिक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने अपनी संपत्तियां दान की, अब यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम इन संपत्तियों की रक्षा करें और जरूरतमंदों को लाभ पहुंचाएं. लेकिन इसके लिए जनता को भी जागरूक होना होगा और वक्फ के ट्रस्टियों से पूछताछ करनी होगी। उन्होंने कहा कि जनता को अपनी-अपनी जरूरतों के अनुसार अपने-अपने क्षेत्रों में वक्फ संपत्तियों के ट्रस्टियों को आवेदन जमा करना चाहिए और उसकी एक प्रति वक्फ बोर्ड को भेजनी चाहिए, ताकि हमें पता चल सके कि किस ट्रस्टी ने दान पर खर्च किया है और किसने नहीं, और समय मामला आने पर हम उनसे पूछताछ कर सकें।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि हज़रत दीवान शाह अरज़ानी के सज्जाद-ए-नशीन प्रोफेसर सैयद शाह हसीन अहमद ने कहा कि हमें पैगंबर मुहम्मद साहब की उम्मत के रूप में एकजुट रहना चाहिए। वक्फ सम्पत्ति की रक्षा करना केवल वक्फ बोर्ड की ही जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उन्होंने आगे कहा कि हम मस्जिद में नमाज़ पढ़ते हैं मगर मस्जिद की ज़मीन बेचकर अपना घर बना लेते हैं, इमाम हुसैन की मजलिस आयोजित करते हैं और इमामबाड़ा की ज़मीन पर कब्ज़ा करके उसे अपनी संपत्ति बना लेते हैं, जो किसी तरह से उचित नहीं है। मौलाना सैयद असद रज़ा ने कहा कि वक्फ का अर्थ है "अपनी संपत्ति को अपने स्वामित्व से हटाकर अल्लाह और पैगंबर मुहम्मद साहब के स्वामित्व में देना।" वक्फ संपत्ति के ट्रस्टियों, प्रबंधकों और समितियों का यह दायित्व है कि वे अपने दायित्वों को समझें।
मौलाना सैयद मुज़फ़्फ़र रज़ा ने कहा कि पैगंबर साहब का जीवन हमारे लिए आदर्श है। यदि हमें मुसलमान बने रहना है, तो हमें पैगंबर साहब के जीवन का अनुसरण करना होगा। मौलाना सैयद नज़रे अली ने अपने संबोधन में कहा कि कर्नल कलबे अली खान साहब का इमामबाड़ा लगभग 200 साल पुराना है। इसकी देखरेख के लिए संरक्षक नियुक्त किया गया था, लेकिन हमारी लापरवाही और गलतियों के कारण अब संरक्षक मालिक बनने और हमारी वक्फ संपत्तियों पर कब्ज़ा करने की कोशिश कर रहा है। इस कार्यक्रम में मौलाना ज़ैगम अब्बास, मौलाना उरूज हसन आबिदी और मौलाना दिलबर रज़ा काज़मी ने भी अपने भाषणों से श्रोताओं को सुशोभित किया। कार्यक्रम का संचालन अहमद अली ने किया, जिसकी शुरुआत पवित्र कुरान के पाठ से हुई, जिसके बाद नात-उल-पाक अदा की गई। सम्मेलन में शहर की सम्मानित हस्तियों और इमामबारा और कर्बला से प्रेम करने वाले असंख्य लोगों ने भाग लिया। सम्मेलन का समापन अहमद अली के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।