लगातार तीन दिन हाउस अरेस्ट को लेकर यूपी प्रशासन पर भड़के मुकेश सहनी : पीएम और गृहमंत्री को पत्र लिख जताई आपत्ति

बिहार के पूर्व मंत्री और वीआईपी के सुप्रीमो मुकेश सहनी को यूपी प्रशासन द्वारा उनके लखनऊ स्थित आवासा पर तीन दिनों से हाउस अरेस्ट रखा गया है। प्रशासन की इस कार्रवाई पर मुकेश सहनी ने आपत्ति दर्ज कराते हुए पीएम और केन्द्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखा है...

लगातार तीन दिन हाउस अरेस्ट को लेकर यूपी प्रशासन पर भड़के मुके
यूपी प्रशासन पर भड़के मुकेश सहनी, पीएम को लिखा पत्र- फोटो : सोशल मीडिया

Patna/Lucknow : विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक और बिहार सरकार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने लखनऊ स्थित अपने आवास पर लगातार तीन दिनों तक नजरबंद (हाउस अरेस्ट) रखे जाने पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। इस दमनकारी कार्रवाई के खिलाफ उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर अपनी गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। सहनी ने इसे अपने संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक अधिकारों का खुला हनन बताते हुए पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।


तीन नोटिस और तीन दिन की नजरबंदी पर उठाए सवाल

प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में मुकेश सहनी ने विस्तृत विवरण देते हुए बताया कि 28 जून 2026 से उन्हें उनके लखनऊ आवास पर प्रभावी रूप से नजरबंद कर दिया गया है। यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि महज दो दिनों के भीतर उन्हें लगातार तीन अलग-अलग नोटिस थमाए गए। इस अप्रत्याशित प्रशासनिक कार्रवाई के कारण वे अपने पहले से तय राजनीतिक कार्यक्रमों, संगठनात्मक बैठकों और आम जनता व समाज के लोगों से मिलने के अधिकार से पूरी तरह वंचित रह गए।


देर रात और तड़के नोटिस देकर आवागमन पर लगाई रोक

नोटिस की टाइमिंग को लेकर सहनी ने प्रशासन की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने बताया कि पहला नोटिस 28 जून की रात लगभग 11 बजे थाना सुशांत गोल्फ सिटी (कमिशनरेट लखनऊ) द्वारा दिया गया। इसके बाद मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के अंदाज में 30 जून की तड़के सुबह करीब 3:30 बजे दूसरा और उसी दिन दोपहर लगभग 1 बजे तीसरा नोटिस जारी कर उनके आवागमन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया। उन्होंने कहा कि संभावित आशंका के आधार पर इस तरह नजरबंद रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक खतरनाक संकेत है।


निषाद समाज के लिए न्याय की आवाज उठाना मेरा दायित्व

मुकेश सहनी ने साफ किया कि वे उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में पूरी तरह शांतिपूर्ण, वैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से रात्रि विश्राम, संगठनात्मक बैठकें और जनसंवाद कार्यक्रम कर रहे थे। अब तक उनके किसी भी कार्यक्रम से कानून-व्यवस्था या सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की एक भी घटना सामने नहीं आई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यूपी में निषाद समाज से जुड़ी हत्याओं और कथित फर्जी मुठभेड़ों (Fake Encounters) के मामलों में निष्पक्ष जांच की मांग करना और पीड़ित समाज के हक व न्याय के लिए आवाज उठाना उनका संवैधानिक दायित्व है।


101 दिवसीय संकल्प यात्रा से पहले स्वतंत्र जांच की मांग

वीआईपी सुप्रीमो ने पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया कि उनकी पार्टी जल्द ही उत्तर प्रदेश में '101 दिवसीय संकल्प यात्रा' शुरू करने जा रही है, जिसे बाधित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री से विशेष अनुरोध किया कि 28 जून से जारी इस नजरबंदी, शाहजहाँपुर पुलिस अधीक्षक के पत्रांक (सी-13/2026) के आधार पर की गई कार्रवाई तथा लगातार जारी किए गए तीनों नोटिसों की वैधानिकता (Legality) और औचित्य की किसी स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि देश में विधि का शासन सुनिश्चित हो सके।



देवांशु प्रभात की रिपोर्ट