'गैस की किल्लत ने फिर पहुंचाया लकड़ी और गोइठा के दौर में, मोदी सरकार अब जागी, वीआईपी प्रमुख का तंज
वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने पीएम मोदी के संसद संबोधन पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार की विदेश और आर्थिक नीतियों को आड़े हाथों लिया।
Patna - विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के संस्थापक और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संसद में दिए गए संबोधन पर प्रतिक्रिया देते हुए सहनी ने कहा कि सरकार अब जागी है, जबकि यह कदम बहुत पहले उठाया जाना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की अदूरदर्शिता के कारण आज देश की जनता आर्थिक बोझ तले दब गई है।
देर से उठाया गया कदम, जनता त्रस्त
मुकेश सहनी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री का संबोधन "देर आए दुरुस्त आए" जैसा है, लेकिन इसका खामियाजा जनता पहले ही भुगत चुकी है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय तनाव का सीधा असर भारत पर पड़ रहा है, जिसे रोकने में सरकार की विदेश नीति विफल रही है। ईंधन की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी और रसोई गैस की किल्लत ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है।
सिर्फ तेल ही नहीं, दवाओं और खाद्य आपूर्ति पर संकट
वीआईपी प्रमुख ने चेतावनी देते हुए कहा कि इस संकट का दायरा केवल पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, "मौजूदा वैश्विक स्थिति के कारण खाद, खाद्य पदार्थों और जीवन रक्षक दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) बुरी तरह प्रभावित हुई है।" सहनी के अनुसार, आने वाले समय में इस कुप्रबंधन का असर आम जनता की थाली और स्वास्थ्य बजट पर और भी गहरा पड़ेगा।
विपक्ष की अनदेखी और चुनावी व्यस्तता पर कटाक्ष
पूर्व मंत्री ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता पक्ष विपक्ष को गंभीरता से लेना ही नहीं चाहता। उन्होंने तंज कसा कि जब भाजपा नेताओं को चुनाव प्रचार से फुर्सत मिली है, तब उन्हें देश की गंभीर स्थिति और जनता की परेशानियां नजर आ रही हैं। सहनी ने आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ के चक्कर में आज पूरे देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को खतरे में डाल दिया गया है।
उज्ज्वला से 'गोइठा' तक का सफर
महंगाई के जमीनी असर पर चर्चा करते हुए मुकेश सहनी ने कहा कि रसोई गैस (LPG) के दाम बढ़ने और इसकी भारी किल्लत के कारण गरीब परिवार एक बार फिर पुराने दौर में लौटने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा, "आज स्थिति यह है कि लोग फिर से लकड़ी और गोइठा (उपले) पर खाना बनाने को विवश हो गए हैं। सरकार के विकास के दावे इस महंगाई में पूरी तरह धुंधले पड़ गए हैं।"