Bihar News: जातिगत गणना, ओबीसी आरक्षण और संवैधानिक सुरक्षा पर राष्ट्रीय संवाद में जुटे देश के दिग्गज, तेजस्वी की मांग का किया समर्थन
Bihar News: जातिगत गणना, ओबीसी आरक्षण और संवैधानिक सुरक्षा पर राष्ट्रीय संवाद का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में अनुसूची IX में आरक्षण विधेयकों को शामिल करने की मांग उठाई गई।

Bihar News: नई दिल्ली के संविधान क्लब ऑफ इंडिया में "जातिगत गणना, ओबीसी आरक्षण और संवैधानिक सुरक्षा सामाजिक न्याय को गहराई देने के लिए एक कार्ययोजना" पर एक राष्ट्रीय संवाद का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन अखिल भारतीय ओबीसी स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIOBCSA) के राष्ट्रीय संयोजक एडवोकेट पंकज कुशवाहा और राष्ट्रीय अध्यक्ष जी. किरण गौड़ के नेतृत्व में किया गया। बिहार और तेलंगाना में पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण विस्तार और जाति सर्वेक्षण की पृष्ठभूमि में आयोजित इस संवाद में देशभर के छात्र, विद्वान, और राजनीतिक नेता शामिल हुए।
इस राष्ट्रीय संवाद का आयोजन AIOBCSA द्वारा किया गया। कार्यक्रम में ओबीसी अधिकारों को मजबूत करने और संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करने की मांग को लेकर गहन चर्चा हुई। राज्यसभा सांसद पी. विल्सन ने अपने संबोधन में सभी राजनीतिक दलों और ओबीसी संगठनों से बिहार और तेलंगाना के आरक्षण विधेयकों को संविधान की अनुसूची IX में शामिल करने के लिए एकजुट प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने तमिलनाडु के आरक्षण कानून का उदाहरण देते हुए कहा कि यह कदम ओबीसी अधिकारों को न्यायिक चुनौतियों और नीतिगत कमजोरियों से बचाने के लिए अनिवार्य है।
तेलंगाना के पिछड़ा वर्ग मंत्री पोनम प्रभाकर ने देशभर के बीसी संगठनों की एकता पर जोर देते हुए कहा कि तेलंगाना के आरक्षण विधेयक को अनुसूची IX में शामिल करने के लिए संयुक्त प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने समान विचारधारा वाले संगठनों से नरेंद्र मोदी सरकार पर दबाव बनाने का आग्रह किया ताकि आरक्षण को सुरक्षित और विस्तारित किया जा सके। पूर्व तेलंगाना मंत्री और बीसी नेता श्रीनिवास गौड़ ने ओबीसी समुदाय से अपने राजनीतिक प्रतिनिधित्व और नेतृत्व को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय और नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण है।
प्रो. सूरज मंडल और प्रो. रतन लाल ने छात्र सक्रियता को सामाजिक न्याय और जाति-आधारित समानता आंदोलनों का आधार बताया। उन्होंने कहा कि इतिहास साक्षी है कि छात्र आंदोलनों ने सामाजिक बदलाव की बड़ी लड़ाइयों को प्रेरित किया है। पूर्व आईएएस अधिकारी चीरंजीवीलु ने बुद्धिजीवियों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सामाजिक न्याय की विचारधारा और नीतिगत वकालत को मजबूत करने में उनकी सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने विद्वानों, नीति निर्माताओं और छात्रों से संविधान में निहित ओबीसी अधिकारों को आगे बढ़ाने की अपील की।
AIOBCSA के राष्ट्रीय संयोजक एडवोकेट पंकज कुशवाहा और राष्ट्रीय सलाहकार अल्ला रामकृष्णा ने ओबीसी आंदोलन को मजबूत करने के लिए छात्र एकता को आवश्यक बताया। कुशवाहा और राष्ट्रीय अध्यक्ष जी. किरण कुमार ने घोषणा की कि संगठन जल्द ही जातिगत जनगणना और शिक्षा व रोजगार में ओबीसी के लिए आनुपातिक आरक्षण की मांग को लेकर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करेगा। अगला बड़ा कार्यक्रम 27 अप्रैल 2025 को बिहार की राजधानी पटना में आयोजित किया जाएगा।
संवाद में इलैया कुमार (SFD), ऋतु अनुपमा (आरक्षण क्लब, JNU), अक्षन रंजन (छात्र राजद), महेश, राकेश सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र नेताओं ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने ओबीसी सामाजिक न्याय आंदोलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई और इसके लिए निरंतर सक्रियता की अपील की। यह राष्ट्रीय संवाद ओबीसी अधिकारों के लिए एक समेकित आंदोलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। कार्यक्रम में संवैधानिक सुरक्षा, जातिगत गणना और आरक्षण के विस्तार की मांगों को मजबूती से दोहराया गया, जिससे सामाजिक न्याय की लड़ाई को नई दिशा मिलने की उम्मीद जगी। बता दें कि बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कई बार इस मांग को उठाया है।