Bihar Legislative Council: निशांत कुमार और दीपक प्रकाश का विधान परिषद जाना तय! विधान परिषद की 10 सीटों के लिए NDA में अंदरूनी हलचल तेज, नामों पर सियासी मंथन चरम पर

Bihar Legislative Council: बिहार की राजनीति एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है, जहां बिहार विधान परिषद की खाली हो रही 10 सीटों को लेकर सत्ता और विपक्ष दोनों खेमों में जबरदस्त हलचल देखी जा रही है। ...

Nishant Kumar and Deepak Prakash Set for Legislative Council
राजनीतिक सरगर्मी बढ़ी- फोटो : social Media

Bihar Legislative Council: बिहार की राजनीति एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है, जहां बिहार विधान परिषद की खाली हो रही 10 सीटों को लेकर सत्ता और विपक्ष दोनों खेमों में जबरदस्त हलचल देखी जा रही है। जैसे-जैसे चुनाव आयोग की अधिसूचना जारी होने की संभावना करीब आ रही है, वैसे-वैसे राजनीतिक गलियारों में दावेदारी और लॉबिंग का दौर तेज हो गया है। सूत्रों के मुताबिक सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन इस बार बेहद सोच-समझकर रणनीति बना रहा है, ताकि संगठन और सरकार के बीच संतुलन कायम रखा जा सके। अंदरखाने चर्चा है कि दो बड़े नाम निशांत कुमार और दीपक प्रकाश इस बार विधान परिषद की रेस में सबसे आगे हैं। बताया जा रहा है कि इन दोनों चेहरों को सत्ताधारी गठबंधन की ओर से लगभग तय उम्मीदवार माना जा रहा है। निशांत कुमार, जिन्होंने हाल ही में 8 मार्च को जनता दल यूनाइटेड (जनता दल यूनाइटेड) का दामन थामा था और बाद में मंत्री पद संभाला, उन्हें राजनीतिक रूप से मजबूत दावेदार माना जा रहा है। वहीं, उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश, जो राष्ट्रीय लोक मोर्चा (राष्ट्रीय लोक मोर्चा) से जुड़े हैं, उनका नाम भी लगभग तय माना जा रहा है। उन्हें एनडीए कोटे से एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने की चर्चा तेज है।

एनडीए के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर भी गहन मंथन चल रहा है। सूत्र बताते हैं कि भारतीय जनता पार्टी (भारतीय जनता पार्टी) और जेडीयू के अलावा एक सीट लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को भी दी जा सकती है। हालांकि छोटे सहयोगी दलों के लिए हिस्सेदारी सीमित रहने की संभावना जताई जा रही है।

इस बार का चुनाव केवल औपचारिकता नहीं बल्कि शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव 2026 की सियासी दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने के साथ-साथ संगठन में सक्रिय लेकिन अब तक उपेक्षित नेताओं को भी मौका देने की रणनीति पर काम चल रहा है।

इधर विपक्ष भी पूरी तरह सक्रिय है। राष्ट्रीय जनता दल (राष्ट्रीय जनता दल) सामाजिक समीकरणों को साधते हुए अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। कांग्रेस भी अपनी हिस्सेदारी को लेकर रणनीति बना रही है। फिलहाल सभी दलों में नामों को लेकर घमासान जारी है। दावेदारों की लंबी कतार, अंदरूनी लॉबिंग और सत्ता-समीकरण की जटिल राजनीति ने इस चुनाव को बेहद दिलचस्प बना दिया है। अब नजर इस बात पर है कि अंतिम सूची में किन चेहरों को जगह मिलती है और कौन इस सियासी दौड़ से बाहर रह जाता है।