लालू यादव के रिकॉर्ड को नीतीश ने किया ध्वस्त, चार सदनों का सफर किया पूरा, अब बिहार की कमान किसके हाथ?

Bihar Politics: नीतीश कुमार बिहार के उन चुनिंदा राजनीतिज्ञों में शामिल हो गए, जिन्होंने चारों सदनों की सदस्यता का ताज अपने सिर सजाया। उनसे पहले यह कारनामा सिर्फ लालू प्रसाद यादव कर चुके हैं।...

Nitish Breaks Lalu Record Completes
लालू यादव के रिकॉर्ड को नीतीश ने किया ध्वस्त- फोटो : social Media

Bihar Politics: बिहार की सियासत में एक नया बाब खुल गया है। सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार  ने शुक्रवार को राज्यसभा के सदस्य के तौर पर शपथ लेकर अपनी सियासी पारी को एक नए मुकाम पर पहुंचा दिया। राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णनन ने एक सादगी भरे मगर अहम समारोह में उन्हें सदन की सदस्यता दिलाई। यह महज़ एक रस्मी अदायगी नहीं, बल्कि सियासत के मैदान में एक बड़ी चाल मानी जा रही है।

नीतीश कुमार अब उन चुनिंदा सियासतदानों की फेहरिस्त में शामिल हो गए हैं जिन्होंने चारों सदनों का सफर तय किया है। इससे पहले लालू प्रसाद यादव इस मुकाम को हासिल कर चुके थे,और अब नीतीश का नाम भी इस खास सूची में शुमार हो गया है। सियासी हलकों में इसे अनुभव का ताज कहा जा रहा है।

शपथ ग्रहण के मौके पर मंत्री ललन सिंह, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, वित्त मंत्री निर्मला सितारमण और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल की मौजूदगी ने इस मौके को और भी वज़नदार बना दिया। वहीं  संजय झा,राजीव शुक्ला,  जयराम रमेश और राजीव प्रताप रुढ़ी जैसे दिग्गजों की मौजूदगी ने साफ कर दिया कि यह सिर्फ शपथ नहीं, बल्कि सियासी ताकत का प्रदर्शन भी है।

दिलचस्प बात यह है कि राज्यसभा की सदस्यता संभालते ही नीतीश कुमार का बिहार की हुकूमत से रिश्ता औपचारिक तौर पर खत्म हो गया है। अब नजरें 14 अप्रैल पर टिक गई हैं, जब एनडीए नया मुख्यमंत्री चुन सकता है। सियासी गलियारों में चर्चाएं गर्म हैं कि यह बदलाव महज़ पद परिवर्तन नहीं, बल्कि रणनीतिक सियासी बिसात का हिस्सा है।

सूत्रों की मानें तो नीतीश कुमार अब दिल्ली की सियासत में सीमित भूमिका निभाएंगे और बिहार में संगठन को मजबूत करने पर जोर देंगे। कहा जा रहा है कि अब वे सत्ता से ऊपर सलाहकार की भूमिका में दिखेंगे जहां उनका तजुर्बा पार्टी और सरकार दोनों के लिए राह दिखाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी तारीफ करते हुए उन्हें अनुभवी और सुशासन के प्रति समर्पित नेता बताया। साफ है नीतीश का यह कदम सियासत में एक नए अध्याय की इबारत लिख रहा है, जहां कुर्सी भले बदली हो, लेकिन असर बरकरार है।