अवैध मेडिकल सेंटरों और नर्सिंग होम पर पटना हाईकोर्ट ने कसा नकेल, ​बिना लाइसेंस वाले  'झोलाछाप' केंद्र पर होगी कार्रवाई

Patna High Court
Patna High Court- फोटो : news4nation

बिहार में बिना पंजीकरण और बिना अनुमति के चल रहे  मेडिकल सेंटरों और नर्सिंग होम पर पटना हाईकोर्ट ने अपनी नकेल कस दी है। राज्य में फल-फूल रहे  स्वास्थ्य केंद्रों के खतरे को देखते हुए कोर्ट ने  जल्द से जल्द नए रेगुलेटरी दिशा-निर्देश जारी करने का निर्देश दिया है। कोर्ट की सख्त टिप्पणी की कि हर जान कीमती है। जस्टिस राजीव राय की पीठ ने वैशाली में बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे बिंदेश्वर साह के क्लीनिक को सील करने के मामले की सुनवाई करते हुए गहरी चिंता व्यक्त की।


कोर्ट ने भोजपुर के चर्चित 'डॉ. दिलीप कुमार उर्फ हरि शंकर पंडित' मामले का हवाला दिया, जहां एक निजी क्लीनिक में हुई मौत के बाद जांच में पता चला था कि अकेले उस जिले में 81 नर्सिंग होम अनियंत्रित रूप से चल रहे थे। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग को यह समझना होगा कि हर जान कीमती है। सुनवाई के दौरान सरकारी वकील प्रशांत प्रताप ने कोर्ट को राज्य सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग अब छोटे स्तर के अस्पतालों (1 से 40 बेड) को विनियमित  करने के लिए अंतिम चरण में है।सरकार ने कोर्ट को बताया गया कि 


नियमों में संशोधन किया गया कि 4 मार्च 2025 की अधिसूचना (संख्या 480-18) के तहत बिहार क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट रूल्स, 2013 में संशोधन कर 1-40 बेड वाले अस्पतालों को फिलहाल छूट दी गई थी ,ताकि उनके लिए नए व्यावहारिक नियम बनाए जा सकें। साथ ही विशेष समिति का गठन: 20 फरवरी ,2026 को डॉ. रेखा झा (निदेशक-प्रमुख, नर्सिंग) की अध्यक्षता में एक 6 सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी।इस कमेटी ने 1 से 40 बेड वाले अस्पतालों के लिए नए दिशा-निर्देशों की रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। 


अधिवक्ता प्रशांत प्रताप  ने बताया कि नियमों का मसौदा  तैयार हो चुका है और विधि विभाग ने अपनी मंजूरी दे दी है।  वर्तमान में यह फाइल वित्त विभाग  के पास है, जिसके बाद इसे सक्षम प्राधिकार से अंतिम मंजूरी मिलते ही अधिसूचित कर दिया जाएगा। इन नए नियमों के लागू होने के बाद, गली-मोहल्लों में चल रहे छोटे क्लीनिकों के लिए सरकार द्वारा तय मानकों को पूरा करना अनिवार्य होगा। 


इससे न केवल अनियंत्रित रूप से चल रहे 'झोलाछाप' सेंटरों पर लगाम लगेगी, बल्कि मरीजों को सुरक्षित और मानक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।पटना हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया है कि वे इस मामले में तेजी दिखाएं और अगली सुनवाई तक वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट पेश करें।


इन मामलों की सुनवाई के दौरान वैशाली  जिले  में  बिना पंजीकरण और  बिना योग्य डॉक्टरों  चल रहे अवैध नर्सिंग होम व क्लीनिकों के विरुद्ध प्रशासन  ने सख्त कार्रवाई की है। अधिवक्ता जीतेन्द्र कुमार सिंह ने इस मामले एक रिपोर्ट   प्रस्तुत  की  है।  पटना हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद, वैशाली के सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी ने कोर्ट   में एक विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल किया है।  


बिना लाइसेंस चल रहा था 'लकवा पोलियो सेंटर'सिविल सर्जन द्वारा दाखिल हलफनामे के अनुसार, राजापाकर थाना अंतर्गत लखनी (बिदुपुर) में डॉ. बिंदेश्वर साह द्वारा संचालित 'लकवा पोलियो सेंटर' पर अवैध रूप से चिकित्सा पद्धति चलाने का आरोप है। जांच में पाया गया कि यह संस्थान 'बिहार क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट' के तहत पंजीकृत नहीं था और यहाँ कोई योग्य या लाइसेंस प्राप्त डॉक्टर भी मौजूद नहीं था।  सिंह ने बताया कि एक लाख रुपये का जुर्माना और प्राथमिकी दर्ज की गयी।


प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए डॉ. बिंदेश्वर साह के संस्थान पर 1,00,000 (एक लाख) रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके अलावा, संस्थान के प्रबंधन को कई बार नोटिस दिए जाने के बावजूद पंजीकरण दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने पर राजापाकर थाने में केस नंबर 146/2025 दर्ज किया गया है। 


पूरे जिले में चल रहा  जांच अभियान चल रहा हैं। सिविल सर्जन ने अदालत को बताया कि यह कार्रवाई केवल एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे जिले में चलाए जा रहे विशेष अभियान का हिस्सा है। जांच के दौरान जिले के कई अन्य प्रमुख संस्थानों में भी खामियां पाई गई हैंl इस मामलें पर  आगे की सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।