मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समृद्धि यात्रा के तीसरे चरण का शेड्यूल जारी, कल से इन जिलों का करेंगे दौरा
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 10 मार्च से अपनी 'समृद्धि यात्रा' के तीसरे चरण की शुरुआत कर रहे हैं। 5 दिनों के इस सघन दौरे में वे सीमांचल और कोसी क्षेत्र के 10 जिलों में विकास कार्यों का जायजा लेंगे।
Patna - बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कल, 10 मार्च से अपनी महत्वाकांक्षी 'समृद्धि यात्रा' के तीसरे चरण पर निकलने जा रहे हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य राज्य के सीमांचल और कोसी क्षेत्रों में चल रही विकास योजनाओं की जमीनी हकीकत जानना है। 14 मार्च तक चलने वाले इस पांच दिवसीय दौरे के दौरान मुख्यमंत्री न केवल परियोजनाओं का निरीक्षण करेंगे, बल्कि अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकें कर कई नई योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी करेंगे।
कोसी क्षेत्र से होगी यात्रा की शुरुआत
यात्रा के पहले दिन, यानी 10 मार्च को मुख्यमंत्री सुपौल और मधेपुरा जिलों का दौरा करेंगे। यहां वे विभिन्न सरकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करेंगे और स्थानीय प्रशासन के साथ बैठक कर फीडबैक लेंगे। इसके बाद, 11 मार्च को वे अररिया और किशनगंज पहुंचेंगे, जहां विकास परियोजनाओं का जायजा लेने के साथ-साथ कुछ नई योजनाओं की सौगात भी क्षेत्र की जनता को दे सकते हैं।
सीमांचल के जिलों में संवाद और निरीक्षण
12 मार्च को मुख्यमंत्री का काफिला पूर्णिया और कटिहार पहुंचेगा। इस दौरान वे विभिन्न विकास कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे और स्थानीय लोगों से सीधा संवाद कर योजनाओं का लाभ उन तक पहुँच रहा है या नहीं, इसकी जानकारी लेंगे। यात्रा के चौथे दिन, 13 मार्च को सहरसा और खगड़िया में समीक्षा बैठकों का दौर चलेगा, जहाँ मुख्यमंत्री अधिकारियों को लंबित कार्यों को समय पर पूरा करने के कड़े निर्देश देंगे।
बेगूसराय और शेखपुरा में समापन
समृद्धि यात्रा के इस तीसरे चरण का समापन 14 मार्च को बेगूसराय और शेखपुरा जिले के दौरे के साथ होगा। इन दोनों जिलों में कार्यक्रमों को पूरा करने के बाद मुख्यमंत्री पटना वापस लौट आएंगे। बता दें कि नीतीश कुमार ने इस वर्ष 16 जनवरी से समृद्धि यात्रा की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य सत्ता और जनता के बीच सीधा जुड़ाव स्थापित करना और विकास को गति देना है।
जमीनी स्तर पर विकास की समीक्षा
मुख्यमंत्री की इस यात्रा को प्रशासनिक और राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यात्रा के माध्यम से वे राज्य के सुदूर इलाकों में चल रही जल-जीवन-हरियाली, सात निश्चय और अन्य कल्याणकारी योजनाओं की स्थिति खुद देख रहे हैं। इससे न केवल सरकारी कामकाज में तेजी आएगी, बल्कि जनता की समस्याओं का मौके पर ही समाधान होने की भी उम्मीद है।