Bihar Politics: राबड़ी आवास पर इस बार नहीं सजी दावत-ए-इफ्तार! लालू परिवार ने तोड़ी 20 साल पुरानी परंपरा, क्या टूट रहा MY समीकरण

Bihar Politics: हर साल इफ्तार पार्टी देने वाले राजद सुप्रीमो लालू यादव ने इस बार राबड़ी आवास पर इफ्तार पार्टी का आयोजन नहीं किया ना ही राजद कार्यालय में इफ्तार पार्टी का आयोजन हुआ। माना जा रहा है कि लालू यादव ने 20 साल पुरानी तोड़ दी है।

राबड़ी आवास
लालू परिवार ने तोड़ी परंपरा - फोटो : social media

Bihar Politics: बिहार की राजनीति में राजद सुप्रीमो लालू यादव एक चर्चित नाम हैं और लालू यादव के द्वारा दी जाने वाली पार्टियां हमेशा सुर्खियां बटोरती हैं। लालू यादव की दही चूड़ा का भोज हो या ईद में इफ्तार पार्टी हो राबड़ी आवास में दोनों ही पार्टियां धूमधाम से मनाई जाती है लेकिन अब यह परंपरा टूटती नजर आ रही है। मकर संक्रांति के अवसर पर राबड़ी आवास में दही चूड़ा भोज का आयोजन नहीं किया गया वहीं अब राजद की ओर से आयोजित की जाने वाली इफ्तार पार्टी भी नहीं हुई। राजद ने अपनी 20 साल पुरानी परंपरा तोड़ दी है।  

राबड़ी आवास पर नहीं होगा इफ्तार पार्टी का आयोजन 

दरअसल, आमतौर पर रमजान के दौरान 10 सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी देवी के आवास पर भव्य इफ्तार का आयोजन किया जाता था, जिसमें पार्टी के शीर्ष नेता, कार्यकर्ता और विभिन्न दलों के नेता शामिल होते थे। नेता सत्ता पक्ष के हो या विपक्ष के लालू यादव के इफ्तार पार्टी में सभी शामिल होते थे। इसके अलावा लालू यादव दही-चूड़ा भोज का भी बड़े स्तर पर आयोजन करते रहे हैं। 

20 साल पुरानी परंपरा लालू परिवार ने तोड़ी 

पिछले साल इफ्तार पार्टी का आयोजन अब्दुल बारी सिद्दीकी के सरकारी आवास पर किया गया था, जिसमें तेजस्वी यादव समेत कई बड़े नेता शामिल हुए थे। वह आयोजन भी RJD की ओर से ही किया गया था। हालांकि इस बार न तो राबड़ी आवास, न ही अब्दुल बारी सिद्दीकी के आवास और न ही पार्टी कार्यालय में कोई इफ्तार पार्टी आयोजित की गई। बताया जा रहा है कि करीब 20 साल पुरानी यह परंपरा पहली बार टूटी है। 

धीरे-धीरे टूट रही परंपराएं 

सको लेकर भाजपा जहां हमलावर है तो वहीं राजद का दावा है कि उनके ओर से जिला स्तर पर इफ्तार पार्टी का आयोजन किया जा रहा है। गौरतलब हो कि लालू यादव के इफ्तार पार्टी की चर्चा हमेशा से रही है। हर साल इसका आयोजन राबड़ी आवास में ही की जाती थी। लेकिन अब धीरे-धीरे लालू परिवार की सभी परंपराएं टूटती नजर आ रही है। 

पटना से रंजन की रिपोर्ट