Bihar Encounter: बिहार में 2026 में एनकाउंटर की झड़ी, 5 महीने में 15 एनकाउंटर से अपराधियों में हड़कंप, पढ़िए सम्राट सरकार का बदमाशों पर गोलियों की हुकूमत की पूरी कहानी!
Bihar Encounter: बिहार में अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान ऑपरेशन लंगड़ा ने कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर बड़ा असर दिखाया है।
Bihar Encounter: बिहार की सरजमीं इन दिनों एक ऐसे सियासी और प्रशासनिक दौर से गुजर रही है, जहां कानून-व्यवस्था की बागडोर अब सख्ती की सियासत के हाथों में दिखाई दे रही है। ऑपरेशन लंगड़ा नाम का विशेष पुलिस अभियान अब राज्य में अपराधियों के लिए किसी कहर और आफत से कम नहीं माना जा रहा है। यह अभियान सिर्फ कार्रवाई नहीं, बल्कि एक सियासी संदेश भी बन चुका है कि अब अपराध और बंदूक की ज़बान नहीं चलेगी, बल्कि कानून की हुकूमत चलेगी, वो भी लोहे के दस्ताने में।
सूत्रों और घटनाक्रमों के मुताबिक, 2026 की शुरुआत से अब तक बिहार पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाइयों में तेज़ी आई है। एनकाउंटर की घटनाएं लगातार सुर्खियों में हैं, जिनमें कई कुख्यात अपराधियों को या तो घायल किया गया या फिर मुठभेड़ में ढेर किया गया। ऑपरेशन लंगड़ा के तहत पुलिस की रणनीति साफ दिखती है अपराधियों के पैर पर निशाना, ताकि उनका अपराधी नेटवर्क वहीं रुक जाए।
राजनीतिक गलियारों में भी इस कार्रवाई की गूंज है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद से प्रशासनिक सख्ती और पुलिस एक्शन में तेजी आई है। पिछले कुछ महीनों में करीब 7 बड़े एनकाउंटर की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जहां लूट, हत्या, रंगदारी और गैंगवार से जुड़े अपराधियों पर शिकंजा कसा गया है।
आज यानी 18 मई को सीवान में 20 लाख की लूट के आरोपी के दोनों घुटनों में गोली लगने की खबर ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। उसी दिन पटना में एक स्कूल शिक्षक पर फायरिंग करने वाले आरोपी को ट्रांसपोर्ट नगर इलाके में पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान घायल किया। इससे पहले 13 मई को बिहटा में दो अपराधियों पर कार्रवाई हुई, जबकि 3 मई को BJP नेता के भांजे की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी को मुठभेड़ में ढेर कर दिया गया।
30 अप्रैल और 29 अप्रैल को भागलपुर और पटना में हुई अलग-अलग घटनाओं में भी पुलिस की सख्त कार्रवाई देखने को मिली, जहां हत्या और लूट के आरोपियों को गोली लगी। 22 अप्रैल को ज्वेलरी लूटकांड में भी पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को घायल किया।
नीतीश कुमार के शासनकाल में भी इस साल की शुरुआत से एनकाउंटर की एक लंबी फेहरिस्त सामने आई है। 25 मार्च को लूट के आरोपियों पर कार्रवाई, 17 मार्च को पुलिस पर हमले के आरोपियों का एनकाउंटर, 16 मार्च को बाढ़ में कुख्यात अपराधी पर कार्रवाई, और 11 फरवरी को STF की मुठभेड़ में कुख्यात सूर्या डॉन पर शिकंजा यह सब घटनाएं इस सख्ती की बानगी पेश करती हैं।6 फरवरी को 300 किलो गोल्ड लूटकांड के मास्टरमाइंड का एनकाउंटर और 22 जनवरी को लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े शूटर के साथ मुठभेड़ ने कानून-व्यवस्था की जंग को और तेज कर दिया। 2 जनवरी से शुरू हुई यह कड़ी धीरे-धीरे एक बड़े अभियान का रूप ले चुकी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऑपरेशन लंगड़ा सिर्फ पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि एक मजबूत संदेश है कि बिहार में अब अपराधियों के लिए कोई नरमी नहीं, सिर्फ सख्ती है। हालांकि, विपक्ष इस पर सवाल भी उठा रहा है और इसे अति-प्रतिक्रियात्मक पुलिसिंग करार दे रहा है।कुल मिलाकर, बिहार में कानून बनाम अपराध की यह जंग अब नए दौर में प्रवेश कर चुकी है, जहां सियासत, सुरक्षा और सख्ती तीनों एक ही मंच पर आमने-सामने खड़े दिखाई दे रहे हैं।