पितर हमारे अदृश्य सहायक, उनका आशीर्वाद जीवन की अदृश्य शक्ति : देवकीनंदन भरद्वाज

पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता ही जीवन की सफलता का मूल आधार; मंगल कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान महायज्ञ का शुभारंभ....

पितर हमारे अदृश्य सहायक, उनका आशीर्वाद जीवन की अदृश्य शक्ति
श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान महायज्ञ का शुभारंभ- फोटो : रिपोर्टर

Patna :  पूर्वज केवल हमारे अतीत का हिस्सा नहीं, बल्कि हमारी जीवन-यात्रा की अदृश्य शक्ति हैं। उनके संस्कार, त्याग और आशीर्वाद पीढ़ियों तक परिवार का मार्गदर्शन करते हैं। पितरों के प्रति श्रद्धा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि अपनी जड़ों के प्रति कृतज्ञता और अपने अस्तित्व के प्रति सम्मान है। जिस परिवार को अपने पूर्वजों का स्मरण रहता है, वहां संस्कारों की परंपरा जीवित रहती है। यह बात महाराज श्री देवकीनंदन भरद्वाज जी ने गुरुवार को जय श्री सीताराम समर्पण ट्रस्ट के तत्वावधान में अंशुल मैरेज हॉल, सगुना मोड़, पटना में शुरू हुए श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान महायज्ञ के शुभारंभ अवसर पर कही।


उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने वर्तमान की सफलता का श्रेय केवल स्वयं को नहीं दे सकता। उसके पीछे माता-पिता, पूर्वजों, गुरुजनों और समाज की अनेक पीढ़ियों का त्याग और योगदान होता है। इसलिए अपने पूर्वजों का स्मरण करना अपनी जड़ों को प्रणाम करने के समान है। पितरों का आशीर्वाद दिखाई नहीं देता, लेकिन उनके दिए संस्कार और जीवन-मूल्य पीढ़ियों को दिशा देते हैं।


जड़ों को भूलकर मजबूत नहीं हो सकता जीवन


महाराज श्री ने कहा कि आज मनुष्य भौतिक सफलता की दौड़ में अपनी जड़ों से दूर होता जा रहा है। धन, पद और प्रतिष्ठा जीवन में महत्वपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन मनुष्य के जीवन की वास्तविक समृद्धि उसके संस्कारों में होती है। जिस घर में माता-पिता का सम्मान, बुजुर्गों का आदर, पितरों का स्मरण और भगवान के नाम का जाप होता है, वहां आने वाली पीढ़ियों को केवल संपत्ति नहीं, बल्कि संस्कारों की सबसे बड़ी विरासत मिलती है।


उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति ने सदैव देवऋण, ऋषिऋण और पितृऋण की भावना को महत्व दिया है। मनुष्य अपने जीवन में जिन सुख-सुविधाओं का अनुभव करता है, उनके पीछे अनगिनत लोगों का योगदान है। इसलिए जीवन का उद्देश्य केवल प्राप्त करना नहीं, बल्कि कृतज्ञ होना और समाज तथा परिवार के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करना भी है।


मंगल कलश यात्रा से भक्तिमय हुआ वातावरण

श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान महायज्ञ के शुभारंभ से पहले सुबह मंगल कलश यात्रा निकाली गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलाएं सिर पर कलश धारण कर यात्रा में शामिल हुईं। भगवान के जयघोष और नाम-स्मरण से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। मंगल कलश यात्रा के बाद विधि-विधान से भागवत भगवान की पूजा-अर्चना की गई और ज्ञान महायज्ञ के सफल आयोजन की प्रार्थना की गई।


कथा के प्रथम दिन श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए महाराज श्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन को समझने और उसे भगवान के चरणों में समर्पित करने का मार्ग है। भागवत मनुष्य को बताती है कि संसार में रहते हुए भी उसके जीवन का केंद्र भगवान की भक्ति, सत्य, करुणा और सद्कर्म हो सकते हैं।


7 अक्टूबर तक चलेगा ज्ञान महायज्ञ


जय श्री सीताराम समर्पण ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान महायज्ञ 1 अक्टूबर से 7 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। कथा का आयोजन प्रतिदिन शाम 5 बजे से रात 8:30 बजे तक अंशुल मैरेज हॉल, हाई टेक हॉस्पिटल के पीछे, सगुना मोड़, बालाजी नगर, न्यू ताराचक, पटना में किया जा रहा है।

आयोजकों ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में कथा में शामिल होकर भागवत श्रवण का लाभ लेने की अपील की। आयोजन स्थल पर पहले दिन से ही श्रद्धालुओं की अच्छी उपस्थिति रही और पूरा परिसर “श्री सीताराम” तथा भगवान श्रीहरि के नाम-स्मरण से गूंजता रहा।