पप्पू यादव को IGIMS में बेड तक नहीं मिला, स्टेचर पर गुजारी रात, सांसद के सचिव का आरोप, 35 साल पुराने केस में पूर्णिया एमपी गिरफ्तार, पटना पुलिस ने घर से उठाया
Pappu Yadav:सांसद पप्पू यादव के निजी सचिव ने भी पुलिस और सिस्टम पर गंभीर इल्ज़ाम लगाए।
Pappu Yadav: बिहार की सियासत और अपराध की दुनिया एक बार फिर आधी रात के सन्नाटे में आमने-सामने आ गई। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को पटना पुलिस ने घर से उठाकर गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई करीब 35 साल पुराने मामले में बेल टूटने के बाद की गई।
पप्पू यादव ने फेसबुक पर तीखा वार किया। उन्होंने लिखा कि NEET छात्रा के लिए न्याय की लड़ाई लड़ने की सज़ा उन्हें दी जा रही है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष और गृह मंत्री से भी सवाल करते हुए आरोप लगाया कि बिहार पुलिस उन्हें मारने आई थी, लेकिन वे बेईमानों की कारगुजारियों को बेनकाब करके रहेंगे। उनका साफ ऐलान था “जेल भेजो या फांसी दो, पप्पू रुकेगा नहीं।”
इधर, पप्पू यादव के निजी सचिव ने भी पुलिस और सिस्टम पर गंभीर इल्ज़ाम लगाए। उन्होंने फेसबुक पोस्ट में दावा किया कि गिरफ्तारी के बाद इलाज के लिए सांसद को पटना के IGIMS लाया गया, जहां उन्हें स्ट्रेचर पर रखा गया, लेकिन बेड तक नसीब नहीं हुआ। इसे उन्होंने बिहार की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था का नमूना बताया।
शुक्रवार देर रात पप्पू यादव के आवास पर अचानक सिविल ड्रेस में अफसर, पांच थानों की पुलिस टीम और भारी फोर्स पहुंच गई। देखते ही देखते इलाका छावनी में तब्दील हो गया। पुलिस का कहना था कि यह 1995 के मामले में कोर्ट के वारंट पर की गई कार्रवाई है, जबकि सांसद ने इसे सियासी साज़िश करार दिया।
हालात उस वक्त और बिगड़ गए जब गिरफ्तारी के दौरान पप्पू यादव बेहोश हो गए। इसके बाद उन्हें देर रात पटना के IGIMS लाया गया, जहां रात करीब 12:30 बजे मेडिकल जांच हुई। पप्पू यादव के निजी सचिव ने आरोप लगाया कि अस्पताल में उन्हें स्ट्रेचर पर रखा गया, बेड तक मुहैया नहीं कराया गया और इसे बिहार की चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था का आईना बताया।
गिरफ्तारी के बाद पप्पू यादव ने फेसबुक पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा “बहुत शानदार बिहार पुलिस। NEET छात्रा के लिए न्याय की लड़ाई लड़ी तो पेट में दर्द हो गया। मुझे मारने आए थे, लेकिन बेईमानों की कारगुजारियों को बेनकाब करके रहूंगा। जेल भेजो या फांसी दो, पप्पू रुकेगा नहीं।”
पटना सिटी एसपी वेस्ट भानु प्रताप सिंह ने साफ किया कि यह 1995 का मामला है, जिसमें ट्रायल चल रहा था और सांसद तय तारीख पर कोर्ट में पेश नहीं हुए थे। इसी वजह से गिरफ्तारी की गई। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी के नाम पर वारंट या कुर्की है, तो पुलिस कभी भी कार्रवाई कर सकती है।