Bihar Politics: बिहार की सियासत में भूचाल! पप्पू यादव का तेजस्वी पर सीधा वार, अहंकार की राजनीति का लगाया आरोप

Bihar Politics: पप्पू यादव ने तंज कसते हुए कहा कि कुछ नेता दही-चूड़ा खाकर नतमस्तक हो जाने की राजनीति करते हैं, जबकि असल में ज़मीनी संघर्ष और विचारधारा से दूरी बनती जा रही है।..

Pappu Yadav Attacks Tejashwi Calls RJD BJP Team
पप्पू यादव का तेजस्वी पर सीधा वार- फोटो : reporter

Bihar Politics:झारखंड राज्यसभा चुनाव परिणाम के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी का पारा चढ़ गया है। निर्दलीय सांसद  पप्पू यादव ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके बयान ने न सिर्फ सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि महागठबंधन की अंदरूनी एकता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

पप्पू यादव ने कहा कि बिहार और झारखंड दोनों जगहों पर राजनीति में अहंकार की झलक दिख रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कुछ नेता दही-चूड़ा खाकर नतमस्तक हो जाने की राजनीति करते हैं, जबकि असल में ज़मीनी संघर्ष और विचारधारा से दूरी बनती जा रही है। उनका यह बयान सीधे तौर पर तेजस्वी यादव की राजनीतिक शैली पर कटाक्ष माना जा रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि कुछ राजनीतिक दल और नेता अब संघर्ष की बजाय सुविधा और समझौते की राजनीति कर रहे हैं। उनके अनुसार, ऐसे लोग केंद्र के साथ “आरामदायक समझौते” की राह चुन रहे हैं और जनता के मुद्दों से दूरी बना रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नेतृत्व अब उस दिशा में जा रहा है जहां “लड़ाई और संघर्ष” की पुरानी परंपरा कमजोर पड़ रही है।

राजनीतिक टिप्पणी के दौरान पप्पू यादव ने कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा जैसे दलों को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि ऐसे नेतृत्व को गठबंधन में बनाए रखने पर पुनर्विचार होना चाहिए, जो “लोक-लाज और जमीनी राजनीति” से दूर हो चुका है। उनके अनुसार, गठबंधन की मजबूती के लिए स्पष्ट और मजबूत नेतृत्व जरूरी है, न कि अवसरवादी राजनीति।

सबसे तीखा बयान देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) अब अपनी मूल राजनीतिक दिशा से भटक चुकी है और कुछ हद तक “बीजेपी के स्क्वाड जैसी भूमिका” में नजर आती है। इस टिप्पणी ने बिहार की सियासत में नई बहस छेड़ दी है।

पप्पू यादव ने यह भी कहा कि पुराने राजनीतिक नेतृत्व जैसे लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार और रामविलास पासवान के दौर की तुलना में वर्तमान नेतृत्व संघर्ष और जनाधार की राजनीति से दूर होता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि अब राजनीतिक दलों में वैसी लड़ाई और जमीनी जुड़ाव दिखाई नहीं देता, जो पहले हुआ करता था।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयानबाज़ी आने वाले दिनों में महागठबंधन के भीतर तनाव और बढ़ा सकती है। हालांकि, आरजेडी या अन्य दलों की ओर से इस बयान पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन बिहार की सियासत में यह मुद्दा गरमाना तय माना जा रहा है।

रिपोर्ट- नरोत्तम सिंह