Digital Arrest Patna: पटना में साइबर अपराधियों का बड़ा खेल,रिटायर्ड इंजीनियर से आरटीजीएस के जरिए ठगे 33.83 लाख

पटना के पीरबहोर में साइबर अपराधियों ने रिटायर्ड इंजीनियर को 3 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' रखकर 33.83 लाख रुपये की ठगी की। जालसाजों ने मुंबई पुलिस व सीबीआई अधिकारी बनकर फर्जी सिम और घोटाले का डर दिखाया था।

Cyber Crime Retired Engineer Patna
पटना में रिटायर्ड इंजीनियर को 3 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' रख ठगे 33.83 लाख रुपये - फोटो : news 4 nation AI

राजधानी पटना के पीरबहोर थाना क्षेत्र में साइबर अपराधियों ने ठगी का एक सनसनीखेज मामला अंजाम दिया है। पथ निर्माण विभाग (RCD) से सेवानिवृत्त एक सहायक अभियंता को अपराधियों ने लगातार तीन दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' (Digital Arrest) में रखकर 33.83 लाख रुपये की बड़ी चपत लगा दी। शातिर ठगों ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का पुलिसकर्मी और सीबीआई (CBI) अधिकारी बताकर बुजुर्ग इंजीनियर को जांच के नाम पर पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया और फिर आरटीजीएस (RTGS) के जरिए लाखों रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए।


फर्जी सिम और 500 करोड़ के घोटाले में फंसाने की दी धमकी

ठगी के इस पूरे खेल की शुरुआत 27 सितंबर को एक व्हाट्सएप कॉल से हुई। कॉलर ने पीड़ित को डराते हुए कहा कि उनके नाम से मुंबई के एयरटेल स्टोर से एक फर्जी सिम कार्ड जारी हुआ है। जब पीड़ित ने मुंबई जाने से इनकार किया, तो उन्हें मुंबई पुलिस और सीबीआई के फर्जी अधिकारियों से कनेक्ट कराया गया। कथित सीबीआई अधिकारी ने नरेश गोयल के 500 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले का हवाला देते हुए दावा किया कि मौके से बरामद 247 एटीएम कार्ड में से एक कार्ड और आधार कार्ड पीड़ित का भी है।


तीन दिनों तक 24 घंटे निगरानी में रखा, फर्जी दस्तावेज भेजकर जीता विश्वास

पीड़ित इंजीनियर पर दबाव बनाने के लिए ठगों ने उन्हें तीन दिनों तक चौबीसों घंटे डिजिटल अरेस्ट में रखा। उन्हें लगातार फोन पर रहने, मोबाइल को हर समय चार्जिंग पर लगाकर रखने और रात में भी जागने का निर्देश दिया गया। जब सेवानिवृत्त अधिकारी ने अपने बैंक खातों की गोपनीय जानकारी देने से हिचकिचाहट दिखाई, तो जालसाजों ने व्हाट्सएप पर पुलिस की वर्दी वाली तस्वीर और सुप्रीम कोर्ट के कथित जांच पत्र भेज दिए। फर्जी कानूनी दस्तावेजों और पुलिस की वर्दी को देखकर पीड़ित सहम गए और उनके झांसे में आ गए।


दो अलग-अलग बैंक खातों से ट्रांसफर करवाए 33.83 लाख रुपये

विश्वास हासिल करने और कानूनी कार्रवाई का खौफ दिखाने के बाद ठगों ने कथित 'सरकारी जांच' के नाम पर रुपये भेजने का दबाव बनाया। पीड़ित ने भयभीत होकर अपने इंडियन बैंक (Indian Bank) खाते से आरटीजीएस के माध्यम से 22,86,477 रुपये हाइलेक्सी फाउंडेशन के खाते में और फिर भारतीय स्टेट बैंक (SBI) खाते से 10,96,747 रुपये एक अन्य बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए। इस तरह साइबर अपराधियों ने दो ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 33,83,224 रुपये अपने खातों में ऐंठ लिए।


जांच के बाद पैसे वापस करने का दिया था भरोसा, ऐसे हुआ ठगी का अहसास

शातिर अपराधियों ने पीड़ित को झांसा दिया था कि यह सिर्फ उनके खातों की सत्यापन जांच (Verification Process) है और जांच पूरी होते ही दो से तीन दिनों के भीतर पूरी रकम उनके खातों में वापस लौटा दी जाएगी। हालांकि, निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी जब उनके बैंक खाते में पैसे वापस नहीं आए और संबंधित नंबरों पर संपर्क कटना शुरू हो गया, तब सेवानिवृत्त इंजीनियर को अपने साथ हुई साइबर ठगी का अहसास हुआ।


पीड़ित ने साइबर थाने में दर्ज कराई शिकायत, पुलिस जांच में जुटी

ठगी का शिकार होने के बाद पीड़ित ने तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर मामले की शिकायत दर्ज कराई। इसके साथ ही उन्होंने पटना के साइबर पुलिस थाने में आवेदन देकर अपनी गाढ़ी कमाई वापस कराने और इस हाई-टेक साइबर गिरोह के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की गुहार लगाई है। शिकायत मिलने के बाद पटना साइबर थाने की पुलिस ने मामला दर्ज कर फर्जी मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और व्हाट्सएप कॉल डिटेल्स की तकनीकी जांच शुरू कर दी है।

पटना से रंजीत की रिपोर्ट