Patna LPG Gas Cylinder: महंगाई का असर किचन से बाहर! फास्ट फूड तक पहुंचे दाम, 5 की रोटी 7 की, समोसा 15 का

Patna LPG Gas Cylinder: पटना में गैस संकट से होटल और स्ट्रीट फूड के रेट महंगे हो गए हैं। इस बीच सिलेंडर की कमी से बढ़ी कीमतों से कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ चुकी है।

Patna LPG Gas Cylinder
स्ट्रीट फूड से रेस्टोरेंट तक बढ़े रेट- फोटो : social media

Patna LPG Gas Cylinder:पटना में होटल, ढाबा और स्ट्रीट फूड का काम करने वालों के लिए हालात आसान नहीं हैं। मार्च 2026 की शुरुआत से ही कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई में दिक्कत आ रही है, जिसका असर अब साफ दिख रहा है। गैस कम मिलने और कीमत बढ़ने की वजह से कई होटल और छोटे दुकानदार अब लकड़ी, कोयला और दूसरे साधनों का सहारा लेने को मजबूर हो गए हैं।

जिन होटल और रेस्टोरेंट ने पहले से गैस बुक कर रखी थी, उन्हें भी अब उनकी जरूरत का पूरा सामान नहीं मिल रहा। उन्हें पहले जितनी गैस मिलती थी, अब उसका सिर्फ करीब 70 प्रतिशत ही मिल पा रहा है। यानी 30 प्रतिशत की कमी पूरी करने के लिए उन्हें कोयला, लकड़ी या इंडक्शन जैसे विकल्प अपनाने पड़ रहे हैं।

कई खाने के समान के दाम बढ़ें

इसका सीधा असर खाने-पीने की चीजों की कीमत पर पड़ा है। पहले 5 रुपए में मिलने वाली रोटी अब 7 रुपए की हो गई है। 10 रुपए का समोसा अब 15 से 20 रुपए में बिक रहा है। चाय, जो पहले 10 रुपए की मिलती थी, अब 15 से 20 रुपए तक पहुंच गई है। चाउमीन और दूसरे फास्ट फूड के दाम भी 5 से 10 रुपए तक बढ़ गए हैं। कुल मिलाकर खाने-पीने की चीजों में करीब 10 से 12 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है।

छोटे दुकानदारों की स्थिति खराब

छोटे दुकानदारों के लिए यह स्थिति और भी मुश्किल है। एक चाय बेचने वाले ने बताया कि कीमत बढ़ाने के बाद ग्राहक कम होने लगे हैं। अगर यही हाल रहा, तो उन्हें दुकान बंद करनी पड़ सकती है या कोई दूसरा काम ढूंढना पड़ सकता है। गैस की कमी के कारण कई बार दुकानदारों को सिलेंडर खत्म होने पर दुकान भी बंद करनी पड़ रही है, क्योंकि वे महंगे दाम पर गैस खरीदना नहीं चाहते।

गैस की कमी का असर

गैस की कमी का असर अब कोयले पर भी दिखने लगा है। पहले जो कोयला 18 से 20 रुपए प्रति किलो मिलता था, अब उसकी कीमत 30 से 40 रुपए तक पहुंच गई है। अच्छे क्वालिटी वाले कोयले के दाम इससे भी ज्यादा हो गए हैं। कई दुकानदार तो अब पहले से कोयला बुक करने लगे हैं ताकि बाद में दिक्कत न हो। स्ट्रीट वेंडरों की हालत सबसे ज्यादा खराब है। कई लोग छोटे गैस सिलेंडर या घरेलू गैस का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि ऐसा करना नियम के खिलाफ है। लेकिन मजबूरी में उन्हें ऐसा करना पड़ रहा है। एक चाउमीन बेचने वाले ने बताया कि छोटा सिलेंडर महंगा पड़ता है और उससे उतनी तेज आंच भी नहीं मिलती, इसलिए वे घरेलू सिलेंडर का इस्तेमाल कर रहे हैं।

गैस सप्लाई पर बड़ा असर

जानकारों का कहना है कि इस पूरी स्थिति के पीछे अंतरराष्ट्रीय हालात भी एक वजह हैं। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव का असर गैस सप्लाई पर पड़ा है। पहले पटना में रोजाना करीब 5 हजार कमर्शियल सिलेंडर की खपत होती थी, जो अब घटकर 3000 से 3500 के बीच रह गई है। इसी वजह से होटल और ढाबे अब फिर से पुराने तरीके यानी लकड़ी और कोयले पर लौट रहे हैं।