Patna High Court: कोविड मौत पर मुआवजा रोकना गलत, सिर्फ RT-PCR रिपोर्ट न होने से विधवा का हक नहीं छिनेगा-हाई कोर्ट
Patna High Court: कोविड-19 से मौत के मामले में केवल तकनीकी आधार पर मुआवजा रोकने को पटना हाईकोर्ट ने गलत करार दिया है। ...
Patna High Court: कोविड-19 से मौत के मामले में केवल तकनीकी आधार पर मुआवजा रोकने को पटना हाईकोर्ट ने गलत करार दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अस्पताल की ओर से जारी मृत्यु प्रमाण पत्र महत्वपूर्ण और विश्वसनीय साक्ष्य है। महज RT-PCR रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होने के आधार पर किसी विधवा को कोविड सहायता राशि से वंचित नहीं किया जा सकता।
जस्टिस आलोक कुमार की एकलपीठ ने आशा देवी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। कोर्ट को बताया गया कि आशा देवी के पति अजय कुमार शर्मा की 21 मई 2021 को मुंगेर के सिटी क्रिटिकल हॉस्पिटल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। अस्पताल द्वारा जारी मृत्यु प्रमाण पत्र में मौत का कारण कोविड-19 दर्ज किया गया था।
याचिका में बताया गया कि जिला प्रशासन ने मेमो संख्या 299, दिनांक 20 मार्च 2023 के जरिए अजय कुमार शर्मा का नाम कोविड मृतकों की सूची में शामिल किया और अनुग्रह राशि भी आवंटित की, लेकिन इसके बावजूद भुगतान नहीं किया गया। मृतक की पत्नी ने आपदा प्रबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य विभाग और मुंगेर के डीएम के समक्ष कई बार अभ्यावेदन दिया।
मामले में तीन सदस्यीय जिला स्वास्थ्य समिति ने RT-PCR रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होने का हवाला देते हुए दावा खारिज कर दिया था। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के पत्र संख्या 186(11), दिनांक 9 मार्च 2022 में स्पष्ट किया गया था कि पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड नहीं होने या टेस्ट रिपोर्ट के अभाव को मुआवजा रोकने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि कोविड सर्टिफिकेट या टेस्ट रिपोर्ट का अभाव अपने आप में निर्णायक नहीं है। जब अस्पताल के प्रमाण पत्र में कोविड को मृत्यु का कारण बताया गया हो और मृतक का नाम जिला स्तर पर स्वीकृत सूची में भी शामिल हो, तो केवल तकनीकी आधार पर सहायता राशि रोकना उचित नहीं है।अदालत ने संबंधित अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर मामले पर नए सिरे से विचार करने और बिहार कोविड सहायता योजना, 2022 के तहत पात्र अनुग्रह राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया।