Patna High Court: पत्नी को हर माह 10 हजार पेंशन से देने होंगे पति को, तीन बेटियों की शादी का खर्च भी उठाएंगे, पटना हाईकोर्ट का अहम आदेश

Patna High Court: पटना हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक अहम मामले में पत्नी और उनकी तीन अविवाहित बेटियों के हित में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। ...

Patna HC Orders 10000 Monthly Pension Transfer Daughters Mar
पत्नी को हर माह 10 हजार पेंशन से देने होंगे पति को- फोटो : social Media

Patna High Court:  पटना हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक अहम मामले में पत्नी और उनकी तीन अविवाहित बेटियों के हित में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। कोर्ट ने पति को निर्देश दिया है कि उनकी पेंशन से हर महीने 10 हजार रुपये स्वतः पत्नी के बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाएं। इसके साथ ही तीनों अविवाहित बेटियों की शादी का खर्च भी पति को वहन करना होगा।

यह आदेश पटना हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस राणा विक्रम सिंह की खंडपीठ ने सुचित्रा देवी की ओर से दायर मिसलेनियस अपील पर सुनवाई के दौरान दिया। सुचित्रा देवी ने भागलपुर की निचली अदालत द्वारा उनके पति के पक्ष में दिए गए तलाक के आदेश को चुनौती देते हुए वर्ष 2021 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों और उनके अधिवक्ताओं की मौजूदगी में आपसी समझौते का प्रयास किया था। समझौता नहीं होने पर मामले को लोक अदालत भेज दिया गया। बाद में मामला दोबारा हाईकोर्ट के समक्ष आया, जहां खंडपीठ ने सुनवाई पूरी करते हुए पत्नी और उनकी तीन अविवाहित बेटियों को राहत देने वाला आदेश पारित किया।

सुनवाई के दौरान सुचित्रा देवी की ओर से अधिवक्ता दीपक कुमार सिन्हा ने कोर्ट को बताया कि पूर्व में दिए गए आदेश के बावजूद पति फरवरी से हर महीने 10 हजार रुपये देना बंद कर चुके हैं। इससे पत्नी के सामने जीवन-यापन का संकट खड़ा हो गया है। अधिवक्ता ने यह भी बताया कि सुचित्रा देवी पर खुद के अलावा तीन अविवाहित बेटियों की जिम्मेदारी है।

वहीं, पति दिनेश सिंह की ओर से उनके अधिवक्ता ने दलील दी कि दुर्घटना में पैर टूट जाने के कारण वह बैंक में हर महीने 10 हजार रुपये जमा नहीं कर पा रहे हैं। इस दलील से असहमत होते हुए खंडपीठ ने स्पष्ट व्यवस्था दी कि अब राशि पति के पेंशन बैंक खाते से स्वतः पत्नी के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी।

कोर्ट ने पत्नी की नियमित आर्थिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 10 हजार रुपये प्रतिमाह देने का आदेश दिया। साथ ही तीनों अविवाहित बेटियों की शादी का खर्च उठाने की जिम्मेदारी भी पति पर डाली गई है। कोर्ट की इस व्यवस्था का उद्देश्य पत्नी और बेटियों के जीवन-यापन तथा भविष्य को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है।बताया गया कि दिनेश सिंह सेवानिवृत्त दारोगा हैं और उनकी पेंशन ही नियमित आय का प्रमुख स्रोत है। हाईकोर्ट के इस आदेश से वर्ष 2021 से लंबित वैवाहिक विवाद का समाधान हुआ और पत्नी तथा उनकी तीन बेटियों को आर्थिक राहत मिली है।