Patna High Court: जाली नोट केस में पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, NIA कोर्ट का जमानत आदेश किया रद्द
Patna High Court: पटना हाईकोर्ट ने जाली भारतीय मुद्रा बरामदगी से जुड़े मामले में एनआईए की विशेष अदालत के जमानत से इनकार करने वाले आदेश को निरस्त करते हुए आरोपी को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है। ...
Patna High Court: पटना हाईकोर्ट ने जाली नोट बरामदगी मामले में एनआईए की विशेष अदालत के जमानत नहीं देने के आदेश को निरस्त करते हुये आरोपी सरफराज उर्फ मुजफ्फर अहमद वानी को तत्काल छोड़ने का आदेश दिया। जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस सुनील दत्ता मिश्रा की खंडपीठ ने जम्मू कश्मीर के अनंतनाग निवासी सरफराज उर्फ मुजफ्फर अहमद वानी की ओर से दायर अर्जी पर सुनवाई के बाद 30 पन्ने का फैसला दिया।
पूर्वी चंपारण के बंजारिया थाना कांड संख्या 229/2024 दिनांक 05.09.2024 से जुड़ा है।बाद में यह मामला गृह मंत्रालय के आदेश पर एनआईए को सौंप दी गई। 5 सितंबर, 2024 को शाम साढ़े पांच बजे एएसआई इंद्रजीत पासवान को गुप्त सूचना मिली कि तीन व्यक्ति बिना नंबर प्लेट की लाल मोटरसाइकिल से नकली नोट लेकर आ रहे हैं।
एनएच-28ए पर खरवा पूल के पास पुलिस ने मोहम्मद नजर सद्दाम, मोहम्मद वारिस और मोहम्मद जाकिर हुसैन को पकड़ा। तलाशी में 500 के कुल 390 जाली नोट, कीमत 1,95,000 रुपये बरामद किये गए। बाइक का इंजन-चेसिस नंबर मिटा हुआ पाया गया।
पूछताछ में तीनों ने बताया कि वे नेपाल के रास्ते पाकिस्तान से जाली नोट लाते हैं और राजेश साहनी के जरिए दिल्ली के रास्ते जम्मू-कश्मीर निवासी सरफराज वानी को सप्लाई करते हैं।बिहार पुलिस ने 24 अकटुबर ,2024 को चारों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।पुलिस ने आवेदकों को अनंतनाग, जम्मू-कश्मीर से गिरफ्तार किया। उसके मोबाइल में एफआईसीएन (जाली भारतीय मुद्रा) की पीडीएफ, वॉयस क्लिप और चैट मिली। एनआईए के विशेष न्यायालय ने 15 जुलाई, 2025 को आवेदक की नियमित जमानत खारिज कर दी।
हाईकोर्ट में बहस के दौरान कोर्ट को बताया गया कि आवेदक मौके पर गिरफ्तार नहीं हुआ,बल्कि उसे जम्मू कश्मीर के अनंतनाग से गिरफ्तार किया गया। उसके पास से कोई बरामदगी नहीं हुई। वह मुर्गी पालन और ई-कॉमर्स में पैसा निवेश करने के कारण नजर सद्दाम के संपर्क में आया था। कोर्ट को बताया गया कि आवेदक को गिरफ्तारी के आधार लिखित में नहीं दिया गया। वही एनआईए की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने माना कि आवेदक को गिरफ्तारी के लिखित आधार की प्रति नहीं दी गई।
कोर्ट ने कहा अपने फैसले में कहा कि एनआईए ने यह साबित करने में विफल रहा कि गिरफ्तारी के आधार लिखित में दिया गया।यही नहीं ,बडगाम के सीजेएम के ट्रांजिट रिमांड आदेश 13, सितम्बर 2024 में केस डायरी और रिमांड की प्रति दो घंटे पहले आरोपी को देने का कोई संकेत नहीं है। इससे आरोपी को जमानत आवेदन दाखिल करने में बाधा हुई।कोर्ट ने इस आधार पर गिरफ्तारी को अवैध ठहराते निचली अदालत के आदेश को निरस्त करते हुए आवेदक को जमानत बांड पर तत्काल छोड़ने का आदेश दिया। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को उसकी उपस्थिति के लिए उचित शर्तें लगाने का पूरा छूट दिया।