Bihar News ; जहानाबाद नरसंहार मामले में पटना हाईकोर्ट ने दो आरोपियों को किया बरी, DGP को अधिकारियों की भूमिका जाँचने का दिया निर्देश

Bihar News ; पटना हाईकोर्ट ने 1996 के बहुचर्चित केयाळ आहर नरसंहार मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के फैसले को पलट दिया है।

Bihar News ; जहानाबाद नरसंहार मामले में पटना हाईकोर्ट ने दो
दो आरोपी बरी - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : पटना हाईकोर्ट ने 1996 के बहुचर्चित नरसंहार मामले में दो उम्रकैद की सजा पाये व्यक्तियों को बरी कर दिया। हाईकोर्ट ने सबूतों के अभाव और लचर जांच के कारण नागेंद्र यादव और बसंत यादव को बरी कर दिया। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष अपना केस साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा।अरवल (तत्कालीन जहानाबाद) के करपी थाना क्षेत्र के केयाळ आहर पर 4 लोगों की निर्मम हत्या हुई थी। पटना हाइकोर्ट ने 1996 के करपी थाना (तत्कालीन जहानाबाद, वर्तमान अरवल जिला) अंतर्गत केयाळ आहर नरसंहार मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया है। 

जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस कुमार मनीष की खंडपीठ ने अपील स्वीकार करते हुए नागेंद्र यादव (उर्फ नागेंद्र सिंह) और बसंत यादव (उर्फ पप्पु यादव) को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। निचली अदालत ने इन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार ये घटना 8-9 सितंबर ,1996 की रात करीब 11 बजे की है। केयाळ आहर के पास सिंचाई के लिए पानी रोकने को लेकर झोपड़ी में पहरा दे रहे लोगों पर 30-40 अज्ञात उग्रवादियों (मजदूर किसान संग्राम परिषद से जुड़े) ने हमला बोल दिया था। इस भयानक रात की घटना में चार लोगों (भारत सिंह, मंगेर सिंह, राम निवास सिंह और नवलेश सिंह) की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जबकि प्रमोद कुमार और अन्य घायल हो गए थे।  

इस घटना के करीब 19 साल बाद कोर्ट में गवाहों द्वारा पहली बार आरोपियों की शिनाख्त (डॉक आइडेंटिफ़िकेशन) कराई गई थी, जिसे हाईकोर्ट ने कानूनन कमजोर और अविश्वसनीय माना। जांच एजेंसी की भारी लापरवाही का भी तथ्य सामने आया। इस मामलें में न तो मुख्य जांच अधिकारी और न ही डॉक्टर की गवाही कराई गई, जिससे घायलों की इंजरी रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट अदालत में ठीक से साबित नहीं हो सकी। कोर्ट ने पाया कि मुख्य सूचनाकर्ता और गवाहों के बयानों में भारी विरोधाभास था तथा पुलिस ने निष्पक्ष व पेशेवर तरीके से जांच नहीं की। हाईकोर्ट ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि किस तरह लचर और लापरवाह जांच के कारण इतने गंभीर मामले के दोषी कानून की गिरफ्त से छूट जाते हैं। 

हाईकोर्ट ने गुजरात राज्य बनाम किशनभाई मामले के सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए बिहार के गृह विभाग, डीजीपी (DGP) और अभियोजन निदेशालय को कड़े निर्देश दिए हैं। डीजीपी, बिहार को एक तीन सदस्यीय वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की कमेटी गठित कर लचर जांच करने वाले अधिकारियों की भूमिका की जाँच करने का निर्देश दिया गया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को ऐसी लापरवाहियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई करने और अपनी कार्यप्रणाली की समीक्षा करने को कहा है।