'सिर्फ गाड़ियों से प्रदूषण नहीं होता', हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा- वायु प्रदूषण का मुख्य विलेन कौन?

पटना हाई कोर्ट में शहर की खराब हवा और प्रदूषण को लेकर चल रही जनहित याचिका पर सुनवाई 12 फरवरी तक के लिए टल गई है। चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू की खंडपीठ ने इस मामले में राज्य सरकार और बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को स्पष्ट डेटा पेश करने का आदेश द

'सिर्फ गाड़ियों से प्रदूषण नहीं होता', हाईकोर्ट ने सरकार से

Patna - पटना हाई कोर्ट ने राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण के गंभीर मामले पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से तीखे सवाल पूछे हैं. अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 फरवरी, 2026 की तारीख तय की है. 

प्रदूषण के मुख्य कारणों पर जवाब तलब

चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू की खंडपीठ ने पिछली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से यह स्पष्ट करने को कहा था कि पटना में वायु प्रदूषण के मुख्य कारक क्या हैं. कोर्ट ने डेटा मांगते हुए पूछा कि आखिर गाड़ियों के धुएं, धूल कणों और निर्माण कार्यों की प्रदूषण में अलग-अलग कितनी भागीदारी है. कोर्ट का मानना है कि केवल गाड़ियों के चलने से प्रदूषण का स्तर इतना नहीं गिर सकता कि लोगों को सांस लेने में कठिनाई हो. 

पुरानी गाड़ियों पर प्रतिबंध पर सवाल

हाई कोर्ट द्वारा नियुक्त कोर्ट मित्र अधिवक्ता शम्भू शरण सिंह ने अदालत को बताया कि 15 वर्ष पुरानी गाड़ियों पर रोक लगाना पर्याप्त नहीं है. उन्होंने तर्क दिया कि यदि इस प्रतिबंध से फर्क पड़ना होता, तो सरकार ने यह नियम कई साल पहले ही लागू कर दिया था. उनके अनुसार, जमीनी हकीकत यह है कि प्रदूषण कम होने के बजाय समय के साथ बढ़ता ही गया है. 

प्रदूषण बोर्ड का पक्ष और सुझाव

बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से वरीय अधिवक्ता शिवेंद्र किशोर ने कोर्ट को जानकारी दी कि बोर्ड ने प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार को कई महत्वपूर्ण सलाह दी हैं. इसमें सीएनजी (CNG) और पीएनजी (PNG) के उपयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक गाड़ियों (Electric Vehicles) के इस्तेमाल पर जोर देने की बात कही गई है. 

सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास

सरकारी वकील विकास कुमार ने अदालत के समक्ष सरकार का पक्ष रखते हुए बताया कि धूल से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए प्रतिदिन पानी का छिड़काव किया जा रहा है. उन्होंने यह भी दावा किया कि 15 साल से पुरानी गाड़ियों के परिचालन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है और लगभग सभी कमर्शियल वाहनों को डीजल से सीएनजी में परिवर्तित करने का आदेश दिया जा चुका है. 

कोर्ट ने मांगा सटीक सर्वे डेटा

सुनवाई के अंत में कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से यह जानना चाहा कि क्या कभी बोर्ड ने प्रदूषण के स्रोतों का सटीक सर्वे किया है. कोर्ट ने राज्य सरकार और बोर्ड को अगली सुनवाई तक यह पूरी जानकारी देने का सख्त निर्देश दिया है कि आखिर प्रदूषण में किसकी कितनी भागीदारी है. इस मामले में कोर्ट ने खबरों पर स्वतः संज्ञान लेकर यह कार्रवाई शुरू की थी.