सस्ता और सुलभ न्याय: हाईकोर्ट का बोझ कम करने के लिए चीफ जस्टिस का मास्टरप्लान, अब जिला अदालतों में ही होगा फैसला

पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने राज्य के सभी जिला जजों को जमानत याचिकाओं का निपटारा स्थानीय स्तर पर करने का निर्देश दिया है, ताकि हाईकोर्ट का बोझ कम हो और लोगों को त्वरित न्याय मिल सके।

सस्ता और सुलभ न्याय: हाईकोर्ट का बोझ कम करने के लिए चीफ जस्ट

Patna - पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू ने राज्य की न्यायिक व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने और लंबित मामलों के बोझ को कम करने के लिए जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को कड़े निर्देश दिए हैं। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि निचली अदालतों को जमानत के मामलों में अधिक सक्रिय और विवेकपूर्ण भूमिका निभानी होगी। 

हाईकोर्ट में जमानत याचिकाओं की 'बाढ़' पर चिंता

चीफ जस्टिस ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि हाईकोर्ट का अधिकांश कीमती समय केवल जमानत याचिकाओं की सुनवाई में ही निकल जाता है। उन्होंने रेखांकित किया कि निचली अदालतें अक्सर 3 से 7 साल तक की सजा वाले छोटे मामलों में भी जमानत देने से हिचकिचाती हैं। इस कारण आरोपी को विवश होकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ता है, जिससे वहां याचिकाओं की संख्या बेतहाशा बढ़ गई है। 

न्यायिक विवेक का उपयोग करने का निर्देश

चीफ जस्टिस ने सभी जिला न्यायाधीशों को निर्देश दिया कि वे जमानत संबंधी मामलों का निपटारा करते समय अपने न्यायिक विवेक का पूरी तरह उपयोग करें। उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट को केवल एक "डाकघर" या "मशीन" की तरह काम नहीं करना चाहिए, जो बस कागजों को आगे बढ़ा दे। अदालतों को यह परखना चाहिए कि क्या प्रथमदृष्टया साक्ष्य जमानत देने के योग्य हैं। यदि कानून सम्मत आधार मौजूद हैं, तो जमानत स्थानीय स्तर पर ही मिलनी चाहिए।  

संवैधानिक मामलों की सुनवाई हो रही प्रभावित

बैठक के दौरान यह बात प्रमुखता से उठी कि जमानत याचिकाओं की भीड़ के कारण हाईकोर्ट के समक्ष लंबित अन्य महत्वपूर्ण और संवैधानिक मामलों की सुनवाई में देरी हो रही है। चीफ जस्टिस ने कहा कि हाईकोर्ट एक संवैधानिक न्यायालय है, जिसका मुख्य कार्य जटिल कानूनी और संवैधानिक विषयों की व्याख्या करना है। यदि निचली अदालतें जमानत के मामलों को प्रभावी ढंग से निपटाएंगी, तो हाईकोर्ट अन्य गंभीर मामलों पर ध्यान केंद्रित कर सकेगा। 

वरिष्ठ न्यायाधीशों ने भी किया मार्गदर्शन

इस महत्वपूर्ण विमर्श में चीफ जस्टिस के साथ हाईकोर्ट के कई अन्य वरिष्ठ न्यायाधीश भी शामिल थे। जस्टिस प्रभात कुमार सिंह, जस्टिस नवनीत कुमार पांडेय, जस्टिस सत्यव्रत वर्मा, जस्टिस राजेश कुमार वर्मा, जस्टिस चन्द्रशेखर झा और जस्टिस आर.पी. मिश्रा ने भी जिला न्यायाधीशों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। सभी जजों ने एक स्वर में निचली अदालतों को अपनी कार्यप्रणाली में सकारात्मक सुधार लाने और मुकदमों के बोझ को कम करने में सहयोग करने को कहा। 

आम जनता को मिलेगा सस्ता और सुलभ न्याय

हाईकोर्ट के इस निर्देश का सीधा लाभ बिहार की आम जनता को मिलेगा। अब लोगों को छोटे अपराधों या कम सजा वाले मामलों में जमानत के लिए राजधानी पटना आने और हाईकोर्ट की लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरने की आवश्यकता कम होगी। स्थानीय अदालतों से ही समय पर राहत मिलने से न केवल लोगों के पैसे बचेंगे, बल्कि जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों की संख्या में भी कमी आएगी।