पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 37 साल बाद खुलेगा द्वारका नाथ कॉलेज के भाग्य का ताला, 'गुम' फाइल दोबारा बनाने का आदेश!

पटना हाईकोर्ट ने मसौढ़ी स्थित द्वारका नाथ कॉलेज को मगध विश्वविद्यालय से अंगीभूत (Constituent) करने के 37 साल पुराने सरकारी निर्णय को लागू न करने पर कड़ा रुख अपनाया है। सरकारी कार्यालय से फाइल गुम हो जाने की घटना को कोर्ट ने कॉलेज और उसके कर्मियों के

पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 37 साल बाद खुलेगा द्वारका नाथ क

Patna - पटना हाईकोर्ट ने सरकारी दफ्तरों की कार्यशैली पर गहरी नाराजगी जताते हुए द्वारका नाथ कॉलेज, मसौढ़ी को अंगीभूत करने का 37 साल पुराना निर्णय लागू करने का आदेश दिया है। 1987 में राज्य सरकार द्वारा लिए गए फैसले के बावजूद फाइल गुम हो जाने के कारण यह कॉलेज आज तक अधर में लटका है। जस्टिस हरीश कुमार ने स्पष्ट किया है कि सरकारी लापरवाही का खामियाजा कॉलेज और उसके कर्मचारी नहीं भुगत सकते।

पटना हाईकोर्ट के जस्टिस हरीश कुमार की एकलपीठ ने जय प्रकाश सिंह एवं अन्य द्वारा दायर रिट याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को कड़े निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि 1987 के अंगीभूत करने संबंधी निर्णय की जो संचिका (फाइल) गुम हो गई है, उसका तीन महीने के भीतर विधिवत पुनर्निर्माण किया जाए। पुनर्निर्मित फाइल को राज्य मंत्रिमंडल (कैबिनेट) के समक्ष प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है, ताकि उस पर अंतिम और विधिवत निर्णय लिया जा सके।

याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता चक्रपाणि ने कोर्ट को बताया कि 1987 में तत्कालीन राज्य सरकार ने 'कॉन्स्टीच्यूएंट कॉलेज स्कीम' के चौथे चरण के तहत सूबे के 36 कॉलेजों को अंगीभूत करने का निर्णय लिया था, जिसमें द्वारका नाथ कॉलेज जत्ती (मसौढ़ी) भी शामिल था। आश्चर्य की बात यह है कि कैबिनेट के फैसले के बावजूद केवल इस कॉलेज की फाइल सरकारी दफ्तरों में गुम हो गई, जिसके कारण पिछले तीन दशकों से अधिक समय से यह प्रक्रिया लंबित है।

यह मामला इतना गंभीर था कि इसे बिहार विधानमंडल के सदन में भी उठाया गया, जहाँ सरकार ने फाइल गुम होने की बात स्वीकार की थी। बिहार विधान परिषद की आश्वासन समिति ने भी कॉलेज को मगध यूनिवर्सिटी का अंगीभूत करने के निर्णय को जल्द लागू करने की घोषणा की थी, लेकिन इसके बावजूद धरातल पर कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। साल 2006 में तत्कालीन महाधिवक्ता कार्यालय ने भी कॉलेज के पक्ष में ही कानूनी परामर्श दिया था।

सुनवाई के दौरान पाटलिपुत्र यूनिवर्सिटी की ओर से अधिवक्ता राणा विक्रम सिंह ने कोर्ट को एक नया तकनीकी पेंच बताया। उन्होंने कहा कि मार्च 2018 से इस कॉलेज का क्षेत्राधिकार मगध विश्वविद्यालय से हटकर पाटलिपुत्र यूनिवर्सिटी के अधीन आ गया है, लेकिन इससे जुड़ी पुरानी संचिकाएं आज तक मगध यूनिवर्सिटी से उन्हें प्राप्त नहीं हुई हैं। वहीं, राज्य सरकार की ओर से स्थायी सलाहकार सुनील कुमार मंडल ने रिट याचिका का विरोध किया।

जस्टिस हरीश कुमार ने सभी पक्षों को सुनने के बाद टिप्पणी की कि सरकार का निर्णय होने के बावजूद फाइल गुम होना कॉलेज कर्मियों के अधिकारों का हनन है। कोर्ट ने शिक्षा विभाग को समयबद्ध तरीके से संचिका का पुनर्निर्माण कर मंत्रिमंडल से मंजूरी लेने की प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया है। इस फैसले से कॉलेज के सैकड़ों कर्मियों और हजारों छात्रों में उम्मीद की नई किरण जगी है, जो दशकों से इस हक की प्रतीक्षा कर रहे थे।