आरा कोर्ट बम धमाका: फांसी की सजा पाए लम्बू शर्मा की अपील पर कल से फिर सुनवाई, हाईकोर्ट ने सजायाफ्ताओं को ऑनलाइन पेश होने का दिया आदेश
आरा सिविल कोर्ट परिसर में हुए सनसनीखेज बम धमाके के मामले में मृत्युदंड की सजा पाए मुख्य आरोपी लम्बू शर्मा और अन्य सजायाफ्ता अपराधियों की अपील पर पटना हाईकोर्ट कल, 12 फरवरी 2026 से पुनः सुनवाई शुरू करेगा।
Patna - बिहार की राजधानी स्थित पटना हाईकोर्ट में आरा सिविल कोर्ट परिसर बम विस्फोट कांड के दोषियों द्वारा दायर अपीलों पर कल यानी 12 फरवरी 2026 से एक बार फिर सुनवाई शुरू होगी। चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने पिछले सप्ताह इन अपीलों पर लंबी बहस सुनी थी। मामला मुख्य अभियुक्त लम्बू शर्मा को मिली मृत्युदंड की सजा और अन्य सात अभियुक्तों की उम्रकैद से जुड़ा है।
जेलों से ऑनलाइन जुड़ेंगे सजायाफ्ता अपराधी
पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश जारी किया था कि सुनवाई के दौरान सभी सजायाफ्ता कैदियों को संबंधित जेलों से ऑनलाइन माध्यम से कोर्ट में उपस्थित रखा जाए। कोर्ट का मानना है कि जिन लोगों को सजा मिली है, उन्हें अपनी अपील पर हो रही अदालती कार्यवाही को प्रत्यक्ष रूप से देखने और समझने का अधिकार है। साथ ही, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिया गया है कि वे इन कैदियों को वकील उपलब्ध कराएं जो उन्हें कानूनी बारीकियों से अवगत कराएंगे।
क्या था 2015 का आरा कोर्ट ब्लास्ट?
बता दें कि 23 जनवरी 2015 को आरा सिविल कोर्ट परिसर में एक आत्मघाती महिला ने खुद को बम से उड़ा लिया था। इस भीषण विस्फोट में महिला समेत दो अन्य लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस धमाके और उससे मची अफरा-तफरी का मुख्य उद्देश्य कुख्यात अपराधी लम्बू शर्मा को भगाना था, जिसमें वह सफल भी रहा था।
निचली अदालत ने सुनाई थी मौत की सजा
21 अगस्त 2019 को आरा के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश त्रिभुवन यादव ने इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए लम्बू शर्मा को भारतीय दंड संहिता और विस्फोटक अधिनियम के तहत मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही कोर्ट ने सात अन्य आरोपियों—चांद मियां, नईम मियां, अखिलेश उपाध्याय, रिंकू यादव, प्रमोद सिंह, श्याम विनय शर्मा और अंशु कुमार को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा दी थी। दोषियों पर भारी आर्थिक दंड भी लगाया गया था।
हाईकोर्ट की खंडपीठ पर टिकी निगाहें
निचली अदालत के इसी कड़े फैसले को दोषियों ने पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी है। अब चीफ जस्टिस की खंडपीठ यह तय करेगी कि क्या निचली अदालत द्वारा दी गई फांसी और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा जाए या इसमें कोई बदलाव किया जाए। कल होने वाली सुनवाई इस बहुचर्चित मामले में काफी अहम मानी जा रही है।