Bihar News : पटना हाईकोर्ट ने फर्जी दस्तावेजों पर विकास मित्र की नियुक्ति मामले पर की सुनवाई, 3 महीने में जांच पूरी करने का दिया निर्देश
Bihar News : पटना उच्च न्यायालय ने गोपालगंज जिले के भोरे प्रखंड अंतर्गत लमीचौर पंचायत में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर विकास मित्र पद पर की गई कथित अवैध नियुक्ति मामले में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है।
PATNA : पटना हाईकोर्ट ने गोपालगंज जिले के लमीचौर पंचायत ,भोरे प्रखंड, में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर विकास मित्र के पद पर की गई नियुक्ति से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों को तीन महीने के भीतर जांच प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। जस्टिस डॉ. अंशुमन की एकलपीठ ने यह आदेश याचिकाकर्ता रामप्रवेश कुमार द्वारा दायर रिट याचिका का निपटारा करते हुए पारित किया। याचिकाकर्ता रामप्रवेश कुमार ने पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि प्रीति कुमारी ने दो-दो मैट्रिक अंकपत्र, फर्जी जाति प्रमाण पत्र तथा माता-पिता के आधार कार्ड व राशन कार्ड में हेरफेर कर अवैध तरीके से विकास मित्र का पद हासिल किया है।
याचिकाकर्ता ने उक्त अवैध नियुक्ति को रद्द करते हुए मेधावी अभ्यर्थी के रूप में स्वयं को नियुक्त करने की मांग की थी। कोर्ट में सुनवाई के दौरान बिहार महादलित विकास मिशन की ओर से अधिवक्ता प्रशांत प्रताप ने पक्ष रखा। अधिवक्ता प्रताप ने कोर्ट के समक्ष प्रारंभिक आपत्ति जताते हुए कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा Quo Warranto की मांग कानूनी रूप से सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि विकास मित्र का पद किसी लोक पद सार्वजनिक पद की श्रेणी में नहीं आता है।
इस वैधानिक आपत्ति के बाद याचिकाकर्ता के वकील ने इस मांग को वापस ले लिया। वहीं, राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को अवगत कराया गया कि बिहार महादलित विकास मिशन के आदेश के आलोक में विवादित कर्मी को दस्तावेजों के सत्यापन तक कार्य करने से रोक दिया गया है तथा मामले की विभागीय व प्रशासनिक जांच शुरू कर दी गई है। कोर्ट द्वारा इस मामलें के तथ्यों और बिहार महादलित विकास मिशन की ओर से अधिवक्ता प्रशांत प्रताप एवं राज्य सरकार द्वारा पेश की गई रिपोर्ट पर ध्यान देते हुए कोर्ट ने माना कि चूंकि जांच प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है, इसलिए याचिकाकर्ता की शिकायत पर कार्रवाई जारी है।
जस्टिस डॉ. अंशुमन ने निर्देश जारी किया कि संबंधित प्राधिकारी और बिहार महादलित विकास मिशन तीन महीने के भीतर इस जांच को तार्किक परिणति तक पहुंचाएं।