पटना हाईकोर्ट का ऐतिहासिक आदेश ! पटना डीएम और कमिश्नर के आदेश को किया रद्द

जस्टिस आलोक कुमार की एकल पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए अधिकारियों के इस रवैये पर सख्त नाराजगी जताई।शस्त्र लाइसेंस देना या न देना अधिकारी की अपनी मनमर्जी पर निर्भर नहीं करता

Patna High Court
Patna High Court - फोटो : news4nation

Patna High Court :  पटना हाईकोर्ट ने डीएम पटना द्वारा पुलिस अधिकारियों के अनुशंसा के बाद भी हथियार लाइसेंस नहीं दिये जाने पर कड़ी नाराज़गी व्यक्त की। कोर्ट ने मसौढ़ी के ठेकेदार को एनपी बोर राइफल लाइसेंस देने से इनकार करने के आदेश  को डीएम और कमिश्नर के आदेश को रद्द किया। 


मसौढ़ी (पटना) निवासी ठेकेदार दिनेश कुमार ने अपनी और अपने परिवार की जान-माल की सुरक्षा के लिए 2022 में एन पी बोर राइफल का लाइसेंस का आवेदन दिया था।  पुलिस की पूरी रिपोर्ट उनके पक्ष में थी!थानाध्यक्ष, मसौढ़ी, एसडीपीओ, एसडीओ और खुद पटना एसएसपी ने लाइसेंस देने की सिफारिश कर फाइल डीएम ऑफिस भेजा था । आवेदक का पुराना केस भी खत्म हो चुका था और वे न्यायालय से पूरी तरह बरी  हो चुके थे। आवेदक पर गोलियों से जानलेवा हमला हो चुका था और  एफआईआर भी दर्ज हुआ।उनकी पत्नी जनप्रतिनिधि होने के नाते सीधे अपराधियों के निशाने पर थीं।   


इसके बावजूद, पटना के जिला मजिस्ट्रेट ने विशेष अनुशंसा की कमी और प्रासंगिक दस्तावेजों का अभाव जैसे गोल-मटोल बहाने बनाकर आवेदन रद्द कर दी। बाद में पटना प्रमंडलीय आयुक्त ने भी आंख मूंदकर इस गलत फैसले पर मुहर लगा दी!  


जस्टिस आलोक कुमार  की एकल पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए अधिकारियों के इस रवैये पर सख्त नाराजगी जताई।शस्त्र लाइसेंस देना या न देना अधिकारी की अपनी मनमर्जी  पर निर्भर नहीं करता! तथ्यों का निष्पक्ष मूल्यांकन अनिवार्य है। जब एसएचओ, एसडीपीओ से लेकर SSP तक ने हरी झंडी दी और आवेदक पर जानलेवा हमला भी हुआ, तो आवेदन खारिज करना पूरी तरह से आधारहीन और अवैध  है।

  

डीएम,  पटना के 04.08.2023 के आदेश और प्रमंडलीय आयुक्त के 19.09.2024 के अपील रद्द करने वाले आदेश को निरस्त कर दिया गया। डीएम, पटना को सख्त निर्देश दिया गया है कि वे ठेकेदार के काम की प्रकृति, उनकी पार्षद पत्नी की सुरक्षा और उन पर हुए जानलेवा हमले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए 3 महीने के भीतर नए सिरे से फैसला लें।  


 बिहार सरकार के गृह विभाग का स्पष्ट निर्देश (10 मार्च, 2022) है कि जनप्रतिनिधियों और उनके परिवारों के शस्त्र लाइसेंस आवेदनों को प्राथमिकता दी जाए।  पटना हाईकोर्ट के इस आदेश ने साफ कर दिया है कि अफसरशाही अब जनता की जान की सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील निर्णयों को मनमाने ढंग से खारिज नहीं कर सकती।