लव जिहाद और ब्लैकमेलिंग: पटना हाईकोर्ट ने कहा- 'आरोप संगीन', अभियुक्त की जमानत याचिका खारिज

पटना हाईकोर्ट ने 'लव जिहाद' और ब्लैकमेलिंग जैसे गंभीर आरोपों से घिरे एक मामले में अभियुक्त की जमानत अर्जी पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अभियुक्त को किसी भी प्रकार की राहत देने से स्पष्ट इनकार कर दिया है।

 लव जिहाद और ब्लैकमेलिंग: पटना हाईकोर्ट ने कहा- 'आरोप संगीन'

Patna - पटना हाईकोर्ट के जस्टिस रमेश चंद्र मालवीय की एकलपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए अभियुक्त की नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अभियुक्त पर लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया अत्यंत संगीन और गंभीर प्रकृति के हैं, ऐसे में उसे जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता। 

नौकरी का झांसा और धर्म छिपाकर यौन शोषण

यह मामला भागलपुर जिले के ललमटिया थाना (कांड संख्या 28/2024) से संबंधित है। अभियुक्त, जिसकी पहचान आर्यन कुमार उर्फ आज़ाद उर्फ मो. आज़ाद के रूप में हुई है, पर आरोप है कि उसने 'लव जिहाद' की मंशा से अपनी पहचान छिपाकर एक नाबालिग पीड़िता को प्रेम जाल में फंसाया। पीड़िता को नौकरी दिलाने का प्रलोभन देकर उसने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। 

अंतरंग वीडियो और ब्लैकमेलिंग का खेल

अभियोजन पक्ष द्वारा कोर्ट में दी गई जानकारी के अनुसार, अभियुक्त ने न केवल पीड़िता का यौन शोषण किया, बल्कि उसकी कई अंतरंग तस्वीरें और वीडियो भी बना लिए। इन आपत्तिजनक वीडियो के आधार पर वह पीड़िता को लगातार ब्लैकमेल कर रहा था और उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दे रहा था। 

164 के बयान ने कमजोर की अभियुक्त की दलील

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि पीड़िता ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए अपने बयान में प्राथमिकी (FIR) में लगाए गए सभी आरोपों की पूरी तरह पुष्टि की है। इसके अतिरिक्त, केस डायरी और पुलिस द्वारा जुटाए गए अन्य साक्ष्य भी अभियुक्त के खिलाफ आरोपों को पुख्ता करते हैं। 

हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी

अदालत ने इन तथ्यों और पीड़िता के बयान को ध्यान में रखते हुए माना कि मामला नाबालिग की सुरक्षा और गंभीर अपराध से जुड़ा है। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्त को इस स्तर पर जमानत देना उचित नहीं होगा, जिसके बाद याचिका को खारिज कर दिया गया।