राज्यपाल के आदेश की अनदेखी! दो साल तक फाइल दबाकर बैठे रहे मुंगेर यूनिवर्सिटी के कुलपति, अब खुद की सैलरी के लिए तरसेंगे, पटना हाई कोर्ट का कड़ा एक्शन

पटना हाई कोर्ट ने मुंगेर विश्वविद्यालय के कुलपति (VC) की कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताते हुए उनके वेतन उठाव पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। जस्टिस अजीत कुमार की एकलपीठ ने यह सख्त आदेश दिया है।

राज्यपाल के आदेश की अनदेखी! दो साल तक फाइल दबाकर बैठे रहे मु

Patna - पटना हाई कोर्ट ने मुंगेर विश्वविद्यालय के कुलपति (VC) की कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताते हुए उनके वेतन उठाव पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। जस्टिस अजीत कुमार की एकलपीठ ने यह सख्त आदेश तब दिया जब उन्हें पता चला कि कुलाधिपति (राज्यपाल) के स्पष्ट निर्देश के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन पिछले दो वर्षों से एक कर्मचारी के भत्तों का भुगतान अटकाए बैठा है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक आवेदक के मामले में ठोस कार्रवाई नहीं होती, कुलपति को वेतन लेने का कोई नैतिक और कानूनी अधिकार नहीं है।

राज्यपाल के आदेश की दो साल से अनदेखी 

पूरा मामला मुंगेर विश्वविद्यालय में कार्यरत ब्रजेन्द्र नारायण दास के बकाया भत्तों से जुड़ा है। आवेदक के अधिवक्ता शिव प्रताप ने कोर्ट को बताया कि राज्यपाल सचिवालय ने 23 मार्च 2023 को ही ज्ञापन संख्या 437 के माध्यम से विश्वविद्यालय को निर्देश दिया था कि आवेदक को महंगाई भत्ता (DA), HRA, चिकित्सा भत्ता और परिवहन भत्ता जैसे सभी लंबित लाभों का भुगतान किया जाए। लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी कुलपति ने इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया।

भत्तों के भुगतान में 'अड़ियल' रवैया 

अधिवक्ता ने कोर्ट में दलील दी कि आवेदक ने अपने बकाया भुगतान के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को कई बार अभ्यावेदन (Representation) दिया और बार-बार गुहार लगाई। इसके बावजूद मुंगेर विश्वविद्यालय के कुलपति ने भुगतान से संबंधित किसी भी आदेश पर हस्ताक्षर नहीं किए। राज्यपाल (कुलाधिपति) के सचिवालय से जारी निर्देश को रद्दी की टोकरी में डालने वाले इस रवैये पर हाई कोर्ट ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है।

अदालत की फटकार: "अब बिना काम के नहीं मिलेगा वेतन" 

जस्टिस अजीत कुमार ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह प्रशासनिक उदासीनता और उच्च अधिकारियों के आदेश की अवहेलना का गंभीर मामला है। कोर्ट ने आदेश दिया कि जब तक आवेदक ब्रजेन्द्र नारायण दास के अभ्यावेदन पर कुलपति कोई अंतिम निर्णय लेकर कार्रवाई सुनिश्चित नहीं करते, तब तक वे खुद के वेतन का उठाव नहीं कर सकेंगे। यह आदेश उन अधिकारियों के लिए चेतावनी है जो अदालती और राजभवन के आदेशों को हल्के में लेते हैं।

अगली सुनवाई 12 मार्च को, कुलपति की बढ़ी मुश्किलें 

हाई कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 मार्च 2026 की तारीख तय की है। मुंगेर विश्वविद्यालय के लिए यह स्थिति बेहद शर्मनाक है क्योंकि एक तरफ जहाँ विश्वविद्यालय वित्तीय संकट और सत्रों की देरी से जूझते हैं, वहीं दूसरी तरफ कुलपति जैसे शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा आदेशों की अवहेलना करना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। अब विश्वविद्यालय प्रशासन को 12 मार्च से पहले इस मामले का निपटारा करना होगा।

विश्वविद्यालय प्रशासन में हड़कंप 

वेतन पर रोक के आदेश के बाद मुंगेर विश्वविद्यालय के प्रशासनिक खेमे में हड़कंप मच गया है। कुलाधिपति के आदेश का पालन न करना अब सीधे कुलपति की जेब पर भारी पड़ रहा है। कानून के जानकारों का मानना है कि यह फैसला उन हजारों कर्मचारियों के लिए उम्मीद की किरण है जिनके जायज हक और भत्ते प्रशासनिक अधिकारियों की लालफीताशाही (Bureaucracy) के कारण दबे रह जाते हैं।