Bihar News : मनी लॉन्ड्रिंग मामला: IAS संजीव हंस से जुड़े केस में पटना हाईकोर्ट सख्त, रिशू श्री की याचिका पर ED से पूछे 16 सवाल

Bihar News :पटना हाईकोर्ट ने चर्चित निलंबित आईएएस (IAS) अधिकारी संजीव हंस से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आवेदक रिशु श्री की याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है.....पढ़िए आगे

Bihar News : मनी लॉन्ड्रिंग मामला: IAS संजीव हंस से जुड़े के
ED से 16 सवाल- फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : पटना हाईकोर्ट ने चर्चित आईएएस संजीव हंस से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रिशु श्री के अर्जी पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से 16 बिंदुओं पर जवाब तलब किया है। न्यायमूर्ति सत्यव्रत वर्मा की एकलपीठ ने रिशु श्री की ओर से दायर अर्जी पर सुनवाई के बाद सवाल जबाब किया है। कोर्ट को बताया गया कि आवेदक  रिशु श्री कंपनी के निदेशक हैं और वे फिलहाल एसयूवी केस में गत 17 जून से हिरासत में हैं। उनका कहना था कि मामले की जड़ रूपसपुर थाना केस 18/2023 है, जो संजीव हंस और गुलाब यादव पर रेप के आरोप में दर्ज हुआ था। इसमें रिशु श्री आरोपी नहीं थे। यही नहीं हाईकोर्ट ने इस प्राथमिकी को 6 अगस्त 2024 को निरस्त कर दिया। और इसी प्राथमिकी के आधार पर ईडी ने केस दर्ज कर 16 जुलाई 2024 को आवेदक के कार्यालय और घर पर छापेमारी कर मोबाइल और सेल डीड जब्त किया।

ईडी पर आरोप  

उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी ने पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों पर जबरन हस्ताक्षर करा लिया, जो अनुच्छेद 20(3) का उल्लंघन है। और इसी जांच के आधार पर ईडी ने धारा 66 के तहत जानकारी साझा कर एसयूवी केस 05/2024 और फिर एसयूवी केस 05/2025 दर्ज कराय। जिसमें टेंडर में हेरफेर कर 265.73 करोड़ के अपराध की बात कही गई और 68.09 करोड़ की संपत्ति जप्त कर ली गई।

अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को 

आवेदक की ओर से दी गई दलील सुनने के बाद कोर्ट ने ईडी से जनाना चाहा कि जब आवेदक रूपसपुर केस में आरोपी नहीं था तो फिर उसके यहां छापा क्यों मारा गया। जब आवेदक के खिलाफ साक्ष्य थी तो विजिलेंस केस में उसे आरोपी क्यों नहीं बनाया। ईडी क्या बिना प्रस्थमिकी के किसी को समन कर सकती है। क्या बिना ईसीआईआर दिखाए गिरफ्तारी के आधार की जांच रिमांड कोर्ट कर सकता है। कोर्ट ने ईडी के संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारी को चार सप्ताह के भीतर जबाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया। अगली पर सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी।

कोर्ट ने ईडी से पूछा 16 सवाल

कोर्ट ने ईडी से पूछा की (i) किस साक्ष्य के आधार पर 16 जुलाई 2024 को कंपनी और घर पर छापा मारा गया? (ii) 18 जुलाई, 18 सितंबर, 20 सितंबर, 21 सितंबर और 1 अकटुबर 2024 को दर्ज बयानों में बिक्री विलेख और मोबाइल जब्ती पर उसने क्या खुलासा किया? (iii-iv) जब 20 अगस्त 2024 को ईडी ने धारा 66 पीएमएलए  के तहत विजिलेंस को सूचना दी, जिस पर विजिलेंस केस 05/2024 दर्ज हुआ, तो आवेदक को नामजद क्यों नहीं बनाया गया? और 20 सितंबर 2024 को दर्ज संसोधन में भी नाम क्यों नहीं दिया गया? (v-vi) क्या 20 सितंबर 2024 तक ईडी के पास कोई साक्ष्य  नहीं थी? यदि थी तो विजिलेंस द्वारा नाम न जोड़ने पर आपत्ति क्यों नहीं की? (vii-ix) 21 सितंबर 24 और 1 अकटुबर 24 के बयानों में क्या खुलासा हुआ जिसके आधार पर ईओयू को सूचना दी गई और एसयूवी केस 05/2025 दर्ज हुआ? क्या अज्ञात सरकारी अधिकारियों की जांच हुई या सिर्फ संजीव हंस ही शामिल थे? ईडी ने अन्य अधिकारियों के नाम दिए थे क्या? (x) क्या ईसीआईआर जांच में नाम आने पर ईडी समन कर सकती है या पुलिस जांच का इंतजार करेगी? (xi) क्या ईसीआईआर  कॉपी दिए बगैर धारा 19 के तहत गिरफ्तारी के आधार की जांच रिमांड कोर्ट कर सकती है ? (xii) ईसीआईआर के आधार पर प्राथमिकी बनती है? (xiii) टेंडर हेरफेर अकेले संभव है या अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत है? (xiv) जब एसयूवी केस 05/2024 ईडी की सूचना पर ही बना तो अतिरिक्त जानकारी की जरूरत क्यों पड़ी? (xv-xvi) ईसीए आईआर 4 और अतिरिक्त जानकारी  में अवेफक के खिलाफ क्या सामग्री है जिसके आधार पर उसे सप्लीमेंट्री कंप्लेंट 13/2025 में आरोपी बनाया गया? और ईसीआईआर-13 में आरोपों में क्या अंतर है?