Bihar News : लंबे समय से अलगाव पति के साथ क्रूरता....पटना हाईकोर्ट ने तलाक के फैसले को रखा बरकरार, कहा-भरण-पोषण के लिए आवेदन करे पत्नी
Bihar News : पटना: पटना उच्च न्यायालय ने वैवाहिक संबंधों में लंबे समय तक अलगाव को क्रूरता का आधार मानते हुए पति को तलाक देने के भोजपुर परिवार न्यायालय के फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है।
PATNA : पटना हाईकोर्ट ने लंबे समय तक वैवाहिक अलगाव को क्रूरता मानते हुए पति को तलाक देने के भोजपुर परिवार न्यायालय के फैसले को सही ठहराया है। हालांकि कोर्ट ने पत्नी को हिंदू विवाह अधिनियम के धारा 25 के तहत स्थायी भरण-पोषण का आवेदन करने की पूरी छूट दी है। कोर्ट ने कहा कि यदि आवेदन दिया जाता हैं, तो परिवार न्यायालय चार माह के भीतर उस आवेदन पर अंतिम निर्णय ले निपटारा करें। जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस राणा विक्रम सिंह की खंडपीठ ने पत्नी की ओर से दायर याचिका पर निर्णय दिया।
पति अभिषेक वर्मा की शादी हिंदू रीति रिवाज से 3 दिसंबर ,2007 को हुआ था। पति का आरोप था कि पत्नी शुरू से असभ्य व्यवहार, सास को प्रताड़ित करना, गहने लेकर मायके को देना और अलग रहने की जिद करती थी। उसके पिता ने जमीन खरीदने के लिए 3 लाख रुपये मांगे, इंकार करने पर दहेज हत्या केस में फंसाने के लिए केरोसिन पीकर आत्महत्या की धमकी दी। 28 मार्च ,2008 को पत्नी ने केरोसिन पी ली, डॉक्टरों ने जान बचाई और 29 मार्च ,2008 को बिना बताए मायके चली गई।
पति ने 6 नवंबर, 2008 को वापस लाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं लौटी। वही पत्नी का कहना था कि पति और ससुराल वाले दहेज मांगते थे, पति का शीश महल चौक पर अभिषेक ज्वेलर्स नाम से दुकान है और वह एक हजार रुपये रोज कमाता है। ससुर एलआईसी में कैशियर के पद पर कार्यरत हैं। जमीन खरीदने के लिए 3 लाख रुपया मांगने का आरोप झूठा है। 13 दिसंबर 2008 को स्त्रीधन रखकर ससुराल से निकाल दिया गया। पति ने 2008 में तलाक केस किया। जो 14 जुलाई, 2010 को रद्द हो गया। उसके खिलाफ विविध अपील किया। वह भी 18 नवंबर, 2011 को रद्द हो गया। फिर न्यायिक पृथक्करण दायर किया, जो अदम पैरवी में रद्द हो गया। इसके बाद वैवाहिक मामला दायर किया, जो 11 जून ,2015 को खारिज हुआ, लेकिन पति की विविध अपील को हाईकोर्ट ने 17 जनवरी, 2017 को स्वीकार कर केस को वापस परिवार न्यायालय भेज दिया।
आरा के प्रधान न्यायाधीश ने 7 जून ,2022 को निर्णय और 22 जून ,2022 को तलाक का डिक्री दिया। इस आदेश को पत्नी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। इस मामलें पर खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए कहा कि 18 साल से अलग रहने की बात को पत्नी ने इंकार नहीं किया हैं। वाद दायर करने से ठीक पहले दो साल से अधिक का पूर्ण परित्याग साबित है। पत्नी का लंबा अलगाव और वैवाहिक संबंध से इंकार पति के प्रति क्रूरता है। कोर्ट ने परिवार न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने से इंकार करते हुये पत्नी की ओर से दायर अपील को खारिज कर दिया।