IGIMS में पेपर लीक का महाखेल! रिपोर्ट दबी, कुर्सियां हिलीं, डीन गायब! मेडिकल सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

एमबीबीएस और पीजी फाइनल ईयर परीक्षा को लेकर उठे कथित पेपर लीक और धांधली के संगीन इल्ज़ाम की जांच रिपोर्ट आने के बाद पूरा सिस्टम एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां हर चुप्पी एक रहस्य है, हर फाइल एक राज और हर बयान एक ढका-छिपा सच लगता है।...

Patna IGIMS Paper Leak Row Report Withheld Dean Missing Syst
कौन संभाल रहा मेडिकल संस्थान?- फोटो : social Media

IGIMS: पटना का नामी मेडिकल संस्थान इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) इन दिनों किसी शैक्षणिक केंद्र से ज्यादा एक सिस्टम क्राइसिस ज़ोन में तब्दील होता नजर आ रहा है। एमबीबीएस और पीजी फाइनल ईयर परीक्षा को लेकर उठे कथित पेपर लीक और धांधली के संगीन इल्ज़ाम अब सिर्फ अफवाह नहीं, बल्कि एक ऐसे खुफिया घोटाले की शक्ल ले चुके हैं जिसने पूरे मेडिकल प्रशासन की नींद उड़ा दी है। मामले की तहकीकात के लिए गठित उच्चस्तरीय जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट निदेशक डॉ. बिंदे को सौंप दी है, लेकिन इस रिपोर्ट को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। यही चुप्पी अब सबसे बड़ा सवाल बन चुकी है आखिर रिपोर्ट में ऐसा क्या है जिसे छिपाया जा रहा है?  सूत्रों के मुताबिक, जांच रिपोर्ट के बाद परीक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर कुर्सी-हिलाओ अभियान चल रहा है। कई अफसरों और कर्मचारियों के ट्रांसफर की तैयारी है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि अंदरखाने कुछ बड़ा गड़बड़झाला हुआ है।

इसी बीच संस्थान की नई डीन डॉ. नीरू गोयल के छुट्टी पर जाने और चार्ज लेने से इनकार करने की खबर ने मामले को और रहस्यमय बना दिया है। जब न्यूज4नेशन की टीम ने उनसे सवाल करने की कोशिश की तो उन्होंने साफ कहा कि वे कोई बयान नहीं देंगी और सभी जवाब मीडिया प्रभारी डॉ. विभूति रंजन देंगे। लेकिन डॉ. विभूति रंजन का फोन तक रिसीव न करना पूरे घटनाक्रम को और भी संदिग्ध बना रहा है।

इधर, डॉ. प्रकाश दुबे के इस्तीफे के बाद बनी नई प्रशासनिक टीम में भी दरारें साफ दिख रही हैं। नए Sub-Dean डॉ. अंजू सिंह  ने कहा कि वे सब डीन का प्रभार लेंगी। उन्होंने साफ कहा कि निदेशक का आदेश है, वे आज प्रभार ले लेंगी।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब परीक्षा प्रक्रिया में सब कुछ ठीक था, तो फिर 2nd Professional MBBS Exam 2023(H) को रद्द क्यों किया गया? क्या यह सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी थी या फिर कागजों के पीछे कोई संगठित पेपर सिंडिकेट काम कर रहा था? आरोप है कि परीक्षा के दौरान गोपनीयता भंग हुई, चयनित छात्रों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई और पूरी प्रणाली को अंदर से कमजोर किया गया। इसी वजह से परीक्षा रद्द करनी पड़ी जो मेडिकल शिक्षा की रीढ़ मानी जाती है।

शैक्षणिक संकाय के अध्यक्ष डॉ. ओम कुमार की अध्यक्षता में बनी कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद भी केस दर्ज न होना अब प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। क्या कानून सिर्फ कागजों तक सीमित है? सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि संस्थान के निदेशक स्वयं भी एक अन्य जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं, जिससे पूरे मामले की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

अब पूरा सिस्टम एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां हर चुप्पी एक रहस्य है, हर फाइल एक राज और हर बयान एक ढका-छिपा सच लगता है। सवाल यह नहीं कि परीक्षा रद्द क्यों हुई, सवाल यह है कि क्या IGIMS में सच को दबाया जा रहा है या सच खुद किसी बड़े सिस्टम के दबाव में कैद है? रिपोर्ट आखिर क्यों सार्वजनिक नहीं की गई? किसे बचाने की कोशिश हो रही है? और सबसे बड़ा सवाल क्या मेडिकल शिक्षा की नींव के साथ सिस्टमेटिक खेल खेला गया है?फिलहाल, IGIMS का यह पूरा मामला एक हाई-वोल्टेज मेडिकल स्कैंडल बन चुका है, जिसका सच अब भी फाइलों, फुसफुसाहटों और सन्नाटे के पीछे दफन नजर आ रहा है। उससे बड़ा सवाल ये है कि सूबे के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की नजर आखिर इन घोटालों पर कब जाएगी।

रिपोर्ट- धीरेंद्र कुमार