पटना जंक्शन पर पार्किंग हुई हाईटेक, नियम भी नए और रेट भी भारी, 27 जनवरी से लागू होंगे बदले नियम
Patna Junction: पटना जंक्शन अब सिर्फ रेल यात्राओं का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि यहां सुविधा, शुल्क और व्यवस्था को लेकर एक नई सियासी बहस भी जन्म ले रही है। ...
Patna Junction: पटना जंक्शन अब सिर्फ रेल यात्राओं का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि यहां सुविधा, शुल्क और व्यवस्था को लेकर एक नई सियासी बहस भी जन्म ले रही है। 27 जनवरी से पटना जंक्शन पर एयरपोर्ट की तर्ज पर प्रीमियम पार्किंग व्यवस्था लागू होने जा रही है। रेलवे प्रशासन इसे यात्रियों की सहूलियत और सुरक्षा से जोड़कर पेश कर रहा है, तो वहीं बढ़े हुए पार्किंग चार्ज को लेकर आम लोगों में सवाल भी उठने लगे हैं। यूं कहें कि सुविधा की चादर ओढ़े यह फैसला अब राजनीति की ज़बान में भी चर्चा का मुद्दा बनता जा रहा है।
रेलवे प्रशासन का दावा है कि प्रीमियम पार्किंग का मकसद जंक्शन परिसर में फैली अव्यवस्था पर लगाम कसना है। भीड़, जाम और अवैध पार्किंग से निजात दिलाने के लिए आधुनिक पार्किंग सिस्टम तैयार किया जा रहा है। बूम बैरियर लगाए जाएंगे, जिससे एंट्री और एग्जिट पूरी तरह नियंत्रित होगी। बिना जरूरत कोई भी वाहन अब जंक्शन परिसर में ठहर नहीं सकेगा। प्रशासन इसे ‘डिसिप्लिन की सियासत’ बता रहा है।
महावीर मंदिर साइड से वाहनों की एंट्री तय की गई है और बाहर निकलने के लिए अलग रास्ता निर्धारित होगा। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इससे ट्रैफिक का दबाव कम होगा और जंक्शन के आसपास लगने वाला जाम इतिहास बन जाएगा। यात्रियों के लिए पिक एंड ड्रॉप की सुविधा भी रखी गई है, जिसमें आठ मिनट तक मुफ्त ठहराव की मोहलत दी जाएगी। तय वक्त से ज्यादा रुकने पर जेब पर बोझ पड़ेगा।
यहीं से शुरू होती है महंगाई बनाम सुविधा की बहस। कार पार्किंग के लिए दो घंटे का शुल्क अब 80 रुपये होगा, जो पहले 60 रुपये था। दो से छह घंटे के लिए 200 रुपये और 24 घंटे के लिए सीधे 500 रुपये चुकाने होंगे। बाइक सवारों के लिए भी राहत कम और बोझ ज्यादा है दो घंटे के लिए 20 रुपये और 24 घंटे के लिए 50 रुपये तय किए गए हैं।
रेलवे प्रशासन इसे पारदर्शिता और सुरक्षा से जोड़कर देख रहा है। कैमरों से निगरानी, भविष्य में डिजिटल टिकटिंग और अनधिकृत वसूली पर रोक का दावा किया जा रहा है। लेकिन सवाल यही है कि क्या आम यात्री इस ‘प्रीमियम व्यवस्था’ को सहजता से स्वीकार करेगा, या फिर यह फैसला सियासी गलियारों में एक नया मुद्दा बनकर गूंजेगा? 27 जनवरी के बाद इसका जवाब पटना जंक्शन की ज़मीन खुद देगी।