Patna Metro: बेली रोड पर मेट्रो का अंडरग्राउंड मिशन शुरू, 16 मीटर गहरी सुरंग, लाखों वाहनों के लिए ट्रैफिक की होगी ये अग्निपरीक्षा
Patna Metro: पटना मेट्रो प्रोजेक्ट का सबसे बड़ी मंजिल शुरू होने जा रहा है। ....
Patna Metro: पटना मेट्रो प्रोजेक्ट का सबसे बड़ी मंजिल शुरू होने जा रहा है। राजधानी की सबसे अहम सड़क बेली रोड (नेहरू पथ) के नीचे नवंबर से मेट्रो टनल की खुदाई शुरू होगी। विकास की इस बड़ी सौगात के साथ ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर प्रशासन के सामने भी एक बड़ा इम्तिहान खड़ा हो गया है। सरकार और मेट्रो प्रशासन का दावा है कि निर्माण कार्य रफ्तार पकड़ेगा, लेकिन आम लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आधी सड़क में राजधानी का ट्रैफिक कैसे संभलेगा।
टनल निर्माण के लिए फिलहाल पटना जू के पास लॉन्चिंग शाफ्ट तैयार किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक अगले तीन माह में इसका काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद इसी शाफ्ट के जरिए जमीन के भीतर टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) उतारी जाएगी। बेली रोड के अंडरग्राउंड सफर को पूरा करने के लिए चार अत्याधुनिक टीबीएम मशीनें मंगाई गई हैं, जो जमीन के नीचे मेट्रो की राह तैयार करेंगी।
योजना के मुताबिक खुदाई का काम दो चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में चिड़ियाघर के पास से दो टीबीएम पश्चिम दिशा की ओर बढ़ेंगी और राजा बाजार से होते हुए रुकनपुरा तक टनल बनाएंगी। दूसरे चरण में दो अन्य टीबीएम पूरब की तरफ बढ़कर विकास भवन और विद्युत भवन तक अंडरग्राउंड रास्ता तैयार करेंगी।
पटना मेट्रो के कॉरिडोर-1 के तहत मीठापुर से पाटलिपुत्र जंक्शन तक करीब 10.54 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड टनल बनाई जाएगी। मीठापुर में एलिवेटेड स्टेशन से रैंप के जरिए मेट्रो लाइन को जमीन के अंदर उतारा जाएगा। इसके बाद यह रेलवे लाइन को पार करते हुए पटना जंक्शन पहुंचेगी और फिर बेली रोड के विद्युत भवन, विकास भवन, पटना जू, राजा बाजार और रुकनपुरा होते हुए आगे बढ़ेगी। रुकनपुरा से दोबारा रैंप बनाकर इसे पाटलिपुत्र एलिवेटेड स्टेशन से जोड़ा जाएगा।
हालांकि असली चुनौती अब ट्रैफिक मैनेजमेंट की है। निर्माण के दौरान बेली रोड पर पांच अंडरग्राउंड स्टेशन बनाए जाएंगे, जिसके लिए जमीन के भीतर करीब 16 मीटर तक खुदाई होगी। ऐसे में सड़क की एक ही लेन से दोनों दिशाओं के निजी वाहनों को गुजरना होगा। यानी जिस सड़क पर पीक ऑवर में प्रति घंटे 12 से 13 हजार पैसेंजर कार यूनिट का दबाव रहता है, वहां आधी जगह में ट्रैफिक चलाना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा।जानकारों का मानना है कि अगर नियमों में सख्ती नहीं बरती गई तो बेली रोड पर हर रोज जाम का संकट गहरा सकता है। इसके लिए भारी संख्या में ट्रैफिक पुलिस बल की तैनाती, अवैध पार्किंग पर रोक और वाहनों की आवाजाही के लिए सख्त गाइडलाइन जरूरी होगी।
व्यावसायिक वाहनों को बेली रोड से दूर रखने की रणनीति भी अहम मानी जा रही है। पटना से दानापुर जाने के लिए अशोक राजपथ और बाइपास जैसे वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल कराने की जरूरत होगी। प्रशासन के सामने अब चुनौती यही है कि मेट्रो की सुरंग तो जमीन के नीचे बने, लेकिन शहर की रफ्तार जमीन के ऊपर बाधित न हो।
मेट्रो का यह प्रोजेक्ट पटना के भविष्य की तस्वीर बदलने वाला बताया जा रहा है, मगर निर्माण के अगले तीन साल राजधानी के ट्रैफिक सिस्टम के लिए कड़ी परीक्षा लेकर आने वाले हैं। विकास की राह में जनता को होने वाली परेशानी कम करना ही अब इंतजामिया की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी।