Shambhu Girls Hostel: नीट छात्रा मौत मामले में सीबीआई ने हाथ किए खड़े, कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट, न्याय की कब्र पर लीपापोती का आरोप

Shambhu Girls Hostel: इंसाफ की उम्मीद में बैठी जनता और एक बदहवास बाप के गाल पर सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट का वह तमाचा मारा है, जिसकी गूंज से कानून का हर गलियारा शर्मसार हो जाए।...

Shambhu Girls Hostel

Shambhu Girls Hostel: इंसाफ की उम्मीद में बैठी जनता और एक बदहवास बाप के गाल पर सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट का वह तमाचा मारा है, जिसकी गूंज से कानून का हर गलियारा शर्मसार हो जाए। पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में दम तोड़ने वाली जहानाबाद की नीट  छात्रा की चीखों को सीबीआई के आला अफसरो ने कागज के चंद पन्नों में दफन कर दिया। सरकार की सबसे बड़ी जांच एजेंसी ने फरमा दिया है कि कोई ठोस सबूत नहीं मिला।

घटना की पटकथा की शुरुआत से ही तमाशा देखिए। पहले तो पटना पुलिस के  अफसरों पर मामले को ठंडे बस्ते में डालने और आत्महत्या की फर्जी थ्योरी गढ़ने के पूर बंदोबस्त का पूरा इंतजाम किया। जब लोगों की लानत-मलानत बढ़ी और सड़कों पर इंकलाब हुआ, तो एसआईटी बना कर जांच शुरु हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आने के बाद तो मामला हीं बदल गया। छात्रा के शरीर पर चोट के भयानक निशान और अंडरगारमेंट्स पर स्पर्म के कतरे भी मिले! यानी दरिंदगी चीख-चीखकर गवाही दे रही थी। फिर भी पुलिस पर आरोप हीं नहीं गंभीर आरोप लगे। तो केस सीबीआई के पास पहुंचा....और अब सीबीआई की  क्लोजर रिपोर्ट...आलम यह रहा कि स्पर्म का सैंपल किसी से मैच ही नहीं हुआ। 

हॉस्टल के मालिक को गिरफ्तार किया गया, मगर न तो बिहार पुलिस और न ही  सीबीआई नियत वक्त पर चार्जशीट दाखिल कर सकी। नतीजा? मुल्जिम को बड़ी बाइज्जत तरीके से जमानत की रेवड़ी मिल गई। सीबीआई  इस केस में नाकाम साबित हुई। मृतका की मां का बयान दर्ज करने के कोर्ट के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में गुहार लगाने पहुंच गई! जिस एजेंसी का काम गुनाहगारों को बेनकाब करना था, वही पीड़ित परिवार के मुंह पर ताला लगाने में अपनी पूरी कुव्वत खपा रही है।

बहरहाल सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दिया है  अब नजरें 13 अक्टूबर पर हैं, देखना यह है कि अदालत क्या  हुक्म देती है।