Bihar Road Accident: हादसे के बाद जिंदगी और मौत के बीच नहीं होगी पैसों की जंग, सरकार ने अस्पतालों को दी ये चेतावनी

Bihar Road Accident: बिहार में सड़क दुर्घटनाओं के बाद घायलों को इलाज के लिए अस्पतालों के चक्कर काटने और पैसों की कमी के कारण जिंदगी से जूझने की नौबत न आए, इसके लिए सरकार ने पीएम राहत योजना को जमीन पर उतारने की कवायद तेज कर दी है। ...

Bihar Road Accident: हादसे के बाद जिंदगी और मौत के बीच नहीं
हादसे में घायलों को अब इलाज के लिए नहीं भटकना होगा- फोटो : X

Bihar Road Accident: बिहार में सड़क दुर्घटनाओं के बाद घायलों को इलाज के लिए अस्पतालों के चक्कर काटने और पैसों की कमी के कारण जिंदगी से जूझने की नौबत न आए, इसके लिए सरकार ने पीएम राहत योजना को जमीन पर उतारने की कवायद तेज कर दी है। अब सड़क हादसे में घायल पात्र पीड़ितों को अधिकतम सात दिनों तक 1.50 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिल सकेगा। यानी हादसे के बाद शुरुआती वक्त में इलाज के लिए जेब की हैसियत नहीं, बल्कि घायल की जिंदगी प्राथमिकता होगी।

योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर बुधवार को पटना के पुराने सचिवालय स्थित अधिवेशन भवन में एकदिवसीय राज्यस्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें परिवहन, स्वास्थ्य और पुलिस विभाग के अधिकारियों के साथ अस्पतालों की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

गोल्डेन ऑवर में इलाज नहीं मिला तो पछतावे का क्या फायदा!

स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने सड़क दुर्घटनाओं को राज्य की बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि हादसे के बाद पहला एक घंटा यानी गोल्डेन ऑवर बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान घायल को अस्पताल पहुंचाकर समय पर उपचार उपलब्ध करा दिया जाए तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।

बात भी बिल्कुल साफ है, दुर्घटना के बाद घायल की सांसें थमने का इंतजार करने से बेहतर है कि सिस्टम समय रहते हरकत में आए। अस्पतालों को निर्देश दिया गया कि सड़क दुर्घटना के सभी पात्र पीड़ितों का शत-प्रतिशत पंजीकरण सुनिश्चित करें और इलाज में संवेदनशीलता दिखाएं।

अस्पतालों पर लगेगा बोर्ड, हाईवे पर भी दिखेगी योजना

परिवहन सचिव राज कुमार ने कहा कि योजना का लाभ जरूरतमंदों तक बिना अनावश्यक देरी के पहुंचना चाहिए। इसके लिए परिवहन, स्वास्थ्य और पुलिस विभाग के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।

उन्होंने बताया कि योजना के प्रचार-प्रसार के लिए सभी अस्पतालों में पीएम राहत योजना के बोर्ड लगाए जाएंगे। साथ ही राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के किनारे होर्डिंग लगाकर लोगों को जागरूक किया जाएगा।

स्वास्थ्य सचिव ने यह भी कहा कि पीएम राहत योजना से जुड़े अस्पतालों की जानकारी गूगल मैप पर उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि दुर्घटना के समय लोगों को नजदीकी संबद्ध अस्पताल खोजने में परेशानी न हो।

डायल-112 से लेकर टीएमएस 2.0 तक की जिम्मेदारी तय

राज्य परिवहन आयुक्त आरिफ अहसन ने योजना के तहत सात दिनों तक अधिकतम 1.50 लाख रुपये के कैशलेस उपचार की व्यवस्था की जानकारी दी। कार्यशाला में डायल-112 की भूमिका, टीएमएस 2.0 पोर्टल पर पंजीकरण, पुलिस सत्यापन और आईरैड/ईडार प्रणाली के इस्तेमाल पर भी प्रशिक्षण दिया गया।

पुलिस उप महानिरीक्षक रामा शंकर राय ने डायल-112 की जिम्मेदारियों पर प्रस्तुतीकरण दिया। वहीं रोड सेफ्टी से जुड़े राजीव कुमार ने टीएमएस 2.0 पोर्टल के जरिए दुर्घटना पीड़ितों के पंजीकरण की प्रक्रिया समझाई। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों के दायित्व, कैशलेस इलाज और क्लेम प्रक्रिया की जानकारी दी।

अब कागजों से निकलकर जमीन पर दिखे योजना का असर

कार्यशाला में अपर पुलिस महानिदेशक अमित लोढ़ा, डीआईजी यातायात सुशांत सरोज, परिवहन विभाग के अपर सचिव प्रवीण कुमार और पटना के ट्रैफिक एसपी सागर कुमार झा सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकारी योजनाओं की असली परीक्षा मंचों पर दिए गए भाषणों से नहीं, बल्कि सड़क पर घायल पड़े इंसान को मिलने वाली मदद से होती है। बोर्ड लगाना, होर्डिंग लगाना और पोर्टल बनाना अच्छी पहल है, लेकिन असली काम तब होगा जब हादसे के बाद एंबुलेंस समय पर पहुंचे, अस्पताल बिना देरी इलाज शुरू करे और आर्थिक परेशानी किसी की जिंदगी पर भारी न पड़े। आखिर सड़क पर हादसा अचानक होता है, ऐसे में सरकारी मदद भी उतनी ही तेजी से पहुंचनी चाहिए।

ब्यूरो रिपोर्ट