करोड़ों की मशीनें बनीं शोपीस, तकनीशियनों की कमी से PMCH में MRI-CT Scan सेवा ठप, मरीज बेहाल

PMCH: पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में करोड़ों रुपये की लागत से स्थापित अत्याधुनिक एमआरआई (MRI) और सीटी स्कैन (CT Scan) मशीनें करीब ढाई महीने बाद भी मरीजों के किसी काम नहीं आ रही हैं।

PMCH MRI CT Scan Services Delayed Due to Staff Shortage
करोड़ों की मशीनें बनीं शोपीस- फोटो : social Media

PMCH: पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में करोड़ों रुपये की लागत से स्थापित अत्याधुनिक एमआरआई (MRI) और सीटी स्कैन (CT Scan) मशीनें करीब ढाई महीने बाद भी मरीजों के किसी काम नहीं आ रही हैं। वजह मशीनों में कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि प्रशिक्षित तकनीकी कर्मियों की भारी कमी है। हालात ऐसे हैं कि अस्पताल में आधुनिक सुविधाएं मौजूद होने के बावजूद गंभीर मरीज निजी जांच केंद्रों का रुख करने को मजबूर हैं।

अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, नए रेडियोलॉजी भवन में जून महीने से विभाग का संचालन शुरू हो चुका है। एक्स-रे समेत अधिकांश जांच सेवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन एमआरआई और सीटी स्कैन की सुविधा अब तक शुरू नहीं हो सकी। इसके चलते सड़क दुर्घटना, ब्रेन स्ट्रोक, सिर में गंभीर चोट, रीढ़ की हड्डी की बीमारी और न्यूरोलॉजिकल रोगों से जूझ रहे मरीजों को जांच के लिए निजी अस्पतालों या दूसरे चिकित्सा संस्थानों में जाना पड़ रहा है।

सूत्रों के अनुसार, इस सेवा को तीन शिफ्ट में सुचारु रूप से चलाने के लिए करीब 30 से 32 प्रशिक्षित तकनीकी कर्मियों की आवश्यकता है। इनमें एमआरआई और सीटी स्कैन तकनीशियन, रेडियोग्राफर, सहायक कर्मचारी तथा रिकॉर्ड एवं डेटा प्रबंधन से जुड़े कर्मी शामिल हैं। अस्पताल प्रशासन ने इन पदों पर नियुक्ति के लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया है।

बताया जा रहा है कि सबसे बड़ी अड़चन कम वेतनमान है। वर्तमान में सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में संविदा पर कार्यरत रेडियोलॉजी तकनीशियनों को 18 से 20 हजार रुपये प्रतिमाह देने का प्रावधान है, जबकि निजी अस्पतालों में यही तकनीशियन 30 से 35 हजार रुपये तक वेतन प्राप्त कर रहे हैं। एम्स पटना में भी संविदा तकनीशियनों को लगभग 35 हजार रुपये प्रतिमाह मिलते हैं। ऐसे में योग्य और अनुभवी तकनीशियन कम वेतन पर सरकारी अस्पताल में काम करने के इच्छुक नहीं हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने इसे रोगी कल्याण समिति के पास भेज दिया है। समिति की 1 अगस्त को होने वाली बैठक में तकनीशियनों के वेतनमान और नियुक्ति पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने की संभावना है।

विशेषज्ञों के अनुसार, एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी संवेदनशील जांचों के लिए प्रशिक्षित तकनीशियन अनिवार्य होते हैं। इन्हें मशीन संचालन, मरीज की सुरक्षा, रेडिएशन प्रोटोकॉल, मैग्नेटिक फील्ड सुरक्षा और कंट्रास्ट जांच जैसी प्रक्रियाओं का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। ऐसे में बिना प्रशिक्षित कर्मियों के इन मशीनों का संचालन संभव नहीं है। अब मरीजों और उनके परिजनों की निगाहें 1 अगस्त की बैठक पर टिकी हैं, ताकि करोड़ों की मशीनें आखिरकार मरीजों की सेवा में आ सकें।