Bihar Politics : बिहार में नई सरकार के गठन से पहले सियासी हलचल तेज, जदयू MLC ने बढ़ाया सस्पेंस, क्या निशांत कुमार होंगे नीतीश के उत्तराधिकारी?
PATNA : बिहार की सियासत में इन दिनों भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। 15 अप्रैल को होने वाले संभावित नई सरकार के गठन से पहले मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर सस्पेंस गहरा गया है। राज्य में सत्ता के समीकरणों को लेकर जारी चर्चाओं के बीच अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि एनडीए का शीर्ष नेतृत्व किसके नाम पर अंतिम मुहर लगाएगा। कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार गठन की औपचारिक घोषणा से पहले ही मुख्यमंत्री के नाम का फैसला कर लिया जाएगा।
इसी राजनीतिक गहमागहमी के बीच जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार के एक पोस्टर ने राज्य के सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। नीरज कुमार ने अपने सरकारी आवास के बाहर एक पोस्टर लगाया है, जिसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ उनके बेटे निशांत कुमार की तस्वीर प्रमुखता से दिखाई गई है। पोस्टर पर लिखा नारा 'मजबूत विरासत, भविष्य दमदार, निशांत कुमार हैं तैयार' सीधे तौर पर सत्ता के हस्तांतरण और भविष्य की राजनीति की ओर इशारा कर रहा है। पोस्टर ने इस चर्चा को हवा दे दी है कि क्या मुख्यमंत्री अब अपनी सियासी विरासत अपने बेटे को सौंपने की तैयारी कर रहे हैं।
पोस्टर में नीतीश कुमार और निशांत कुमार के नामों के शुरुआती अक्षरों 'NI' को एक विशेष डिजाइन (NITISH-NISHANT) में जोड़ा गया है। पोस्टर के इस कलात्मक प्रदर्शन को लेकर जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने मीडिया से बात करते हुए इसे 'भविष्य का संकेत' बताया। उन्होंने कहा कि जिस तरह नीतीश कुमार ने बिहार को एक नई पहचान दी है, उसी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए अब नई पीढ़ी पूरी तरह तैयार दिख रही है।
रिपोर्टर द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में प्रवक्ता नीरज कुमार ने साफ किया कि पार्टी के भीतर निशांत कुमार को लेकर एक सकारात्मक माहौल बन रहा है। उन्होंने पोस्टर की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह कार्यकर्ताओं की भावना का प्रतिबिंब है। हालांकि, जब उनसे निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति में आधिकारिक एंट्री के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इसे भविष्य का फैसला बताया, लेकिन यह जरूर कहा कि 'जय निशांत, तय निशांत' का नारा अब कार्यकर्ताओं की जुबान पर है।
यह पोस्टर न केवल एक व्यक्ति का प्रचार है, बल्कि जदयू के भीतर होने वाले बड़े बदलावों का पूर्व संकेत भी हो सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 15 अप्रैल को होने वाले संभावित नई सरकार के गठन से पहले इस तरह के पोस्टरों का सामने आना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। यह बिहार की जनता और विपक्षी दलों के लिए एक संदेश है कि जदयू अपनी अगली पीढ़ी के नेतृत्व को लेकर गंभीर है।
फिलहाल, इस पोस्टर ने बिहार की ठंडी पड़ती सियासत में नई ऊर्जा भर दी है। जहाँ विपक्ष इसे परिवारवाद का नया अध्याय बता रहा है, वहीं जदयू समर्थक इसे राज्य के विकास की निरंतरता के रूप में देख रहे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या निशांत कुमार केवल पोस्टरों तक सीमित रहते हैं या आने वाले दिनों में वे वास्तव में बिहार की सत्ता के केंद्र में नीतीश कुमार के उत्तराधिकारी के रूप में उभरते हैं।
अभिजीत की रिपोर्ट