विश्वकर्मा पूजा के दिन 'सेवा दिवस' के आदेश पर राजनीतिक घमासान, बाढ़ के बीच इस कार्यक्रम पर कांग्रेस ने उठाया सवाल

सरकारी और निजी कार्यालयों तथा स्कूलों में विश्वकर्मा पूजा के दिन शाम 6 बजे "आशीर्वाद का दिया" या "सेवा दिवस" के रूप में कार्यक्रम आयोजित करने संबंधी हालिया प्रशासनिक आदेश पर कांग्रेस ने सवाल उठाया है....

विश्वकर्मा पूजा के दिन 'सेवा दिवस' के आदेश पर राजनीतिक घमासा
बाढ़ के बीच आशीर्वाद का दिया कार्यक्रम पर कांग्रेस ने उठाया सवाल- फोटो : नरोत्तम कुमार

Patna : बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने सरकारी और निजी कार्यालयों तथा स्कूलों में विश्वकर्मा पूजा के दिन शाम 6 बजे "आशीर्वाद का दिया" या "सेवा दिवस" के रूप में कार्यक्रम आयोजित करने संबंधी हालिया प्रशासनिक आदेश को लेकर राज्य सरकार पर करारा प्रहार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह आदेश वस्तुतः देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर सरकारी खर्च और तंत्र का उपयोग कर जश्न मनाने की एक सुनियोजित कवायद है।


बाढ़ और महंगाई के बीच सरकारी खर्च के औचित्य पर सवाल

कांग्रेस प्रवक्ता ने मौजूदा हालात का हवाला देते हुए राज्य सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ जहां आधा बिहार बाढ़ के पानी से जलमग्न है, राज्य में महंगाई और बेरोजगारी चरम पर है, तथा विकास योजनाओं को गति देने के लिए सरकार के पास पर्याप्त कोष नहीं है, वहीं ऐसे संकटपूर्ण समय में सरकारी खर्चे पर प्रखंडों और विद्यालयों में इस तरह के आयोजनों की कोई आवश्यकता नहीं है।


महिला शिक्षिकाओं और कर्मचारियों की सुरक्षा पर बड़ा संकट

कर्मचारियों की व्यावहारिक समस्याओं का जिक्र करते हुए डॉ. वर्धन ने कहा कि शिक्षकों और कर्मचारियों को कार्यालयों व स्कूलों तक आने-जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन का सहारा लेना पड़ता है। विश्वकर्मा पूजा के दिन अधिकांश वाहन सड़कों से नदारद रहते हैं, ऐसे में देर शाम कार्यालयों से वापसी के दौरान महिला शिक्षिकाओं और महिला कर्मियों की सुरक्षा या सुगम आवागमन को लेकर सरकार की ओर से कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं।


मौखिक निर्देशों के जरिए 2014 के बाद की योजनाओं के प्रचार का आरोप

बयान में यह भी आरोप लगाया गया है कि मैदानी स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों को मौखिक निर्देश दिए गए हैं कि वे 50 लोगों का वीडियो तैयार करें, जिसमें वर्ष 2014 के बाद की विकास योजनाओं को प्रमुखता से रेखांकित किया जाए। कांग्रेस का कहना है कि यह निर्देश इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि यह पूरा आयोजन प्रशासनिक कार्यों के बजाय केवल राजनीतिक उद्देश्यों और जन्मदिन के प्रचार के लिए थोपा गया है।


संसाधनों के दुरुपयोग पर रोक और 'तुगलकी फरमान' बताने की मांग

अंत में, कांग्रेस पार्टी ने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि वह सरकारी संसाधनों और मानव बल का दुरुपयोग करने के बजाय इसका उपयोग बिहार के वास्तविक विकास में करे। शिक्षा विभाग के इस पत्र को 'तुगलकी फरमान' करार देते हुए पार्टी ने मांग की है कि भविष्य में ऐसे अलोकप्रिय आदेश जारी करने से बचा जाए, जो जनता और कर्मियों पर अनावश्यक दबाव बनाते हैं।


नरोत्तम की रिपोर्ट